504/☑️ध्यान और हम‼️

🛑अगर आप इस बात को लेकर चिंतित हैं कि ध्यान के दौरान किस चीज पर विचार करना चाहिए, तो इसे लेकर बहुत सोचने की आवश्यकता नहीं है। आप जब ध्यान के सागर में गोता लगाना शुरू करते हैं तो ऐसी चिंता होना सामान्य है। ध्यान में मन को किन बातों पर केंद्रित करना चाहिए, आइए जानें…

“वास्तव में ध्यान आपको यह खुद ही सिखा देता है कि वर्तमान क्षण में होने के लिए आपको क्या महसूस करने -की आवश्यकता है। ध्यान करते हुए बस कुछ पलों में आपको यह अनुभव होने लगता है। जब आप ध्यान कर रहे हों, तो इस बात पर फोकस मत करें कि आप क्या सोच रहे हैं। यह आपके विचारों को स्वाभाविक रूप से प्रवाहित होने में रुकावट पैदा कर सकता है। ध्यान विशुद्ध रूप से वर्तमान क्षण को देखना है। जो कुछ भी हो रहा है, उसमें कोई विरोध नहीं उत्पन्न करना चाहिए।

☑️विचार के रूप में ध्यान !!

अपने आपको किसी चीज के लिए मजबूर करने की
बजाय ध्यान को केवल मन के अवलोकन के रूप में देखें। यह मन को विश्राम देने की राह तैयार करेगा। जब आप अपने मन को इस बात के लिए मजबूर करते हैं कि वह कुछ न सोचे तो वह ज्यादा विचार करने लगता है। आप जिसका प्रतिरोध करते हैं, वह आपसे और चिपक जाता है। शुरू में थोड़ा अस्वाभाविक लग सकता है कि आप बैठ जाएं और उसको बस देखते रहें, जो मन आपके सामने लाता रहे। आपके मन में असहज कर देने वाले ऐसे विचार आ सकते हैं, जो आपको अतीत के बारे में याद दिलाते हों या भविष्य की घटनाओं के बारे में चेतावनी देने वाले हों। यह याद रखना जरूरी है कि ध्यान एक सीखने वाला अनुभव है। ध्यान आपको बताता है कि ये विचार जो उत्पन्न हो रहे हैं, केवल विचार हैं, जिनका सच पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। विचार आप पर तभी अपना प्रभाव डाल सकते हैं, जब आप उन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हैं। विचारों के प्रभाव में आकर आप जितनी प्रतिक्रिया देंगे, मन उन विचारों को लेकर उतने ज्यादा डर और चिंताएं पैदा करेगा।

☑️यह एक दुष्चक्र है !!

मन को शांत करने के लिए अकेले में बैठ कर आपको ध्यान करना चाहिए, यह सोचने की बजाय अपनी एकाग्रता बस एक चीज पर केंद्रित कीजिए। आपके ध्यान सत्र के लिए बस एक चीज जरूरी है कि स्वेच्छा से बैठ गए। यह मन की खुद को शांत करने के लिए जोर देने की बजाय मन को विश्राम करने का पूर्ण अवकाश देगा। यह बात बहुत स्पष्ट है कि एक विचार दूसरे विचार को शांत नहीं कर सकता। यह और ज्यादा विचार उत्पन्न करेगा !!

जिस क्षण आप खुद को तनाव से मुक्त करते हैं और अपना ध्यान अवलोकन पर लाते हैं, उसी क्षण आपका ध्यान अभ्यास गहरा और केंद्रित हो जाता है। यह कभी न भूलें कि ध्यान अवलोकन यानी देखने की क्रिया है।

☑️जो हो रहा है, उसे होने दें !!

ध्यान का उद्देश्य है अपने केंद्र में होना। कोई प्रतिरोध नहीं, कोई प्रयास नहीं, कोई इच्छा नहीं। हम किसी चीज के बारे में न सोचें, इसकी कोशिश भी नहीं करना। बस अपने अस्तित्व में होना। मन को भटकने देना बिल्कुल सामान्य है। ऐसे अवसर कई बार आएंगे, जहां आपके ध्यान सत्र एक दूसरे से अलग होंगे। एक दिन ऐसा आएगा, जब आपको ध्यान में गहन और अद्भुत अनुभव होंगे। अगले दिन आप संतुलित और स्थिर महसूस करेंगे।

जिस क्षण आप स्वयं को एक निश्चित प्रकार के ध्यान के लिए मजबूर करेंगे, उसी क्षण आप असफलता के मार्ग पर धकेल देंगे। यह ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है कि ध्यान का उद्देश्य क्या है- खुद को केंद्रित करना, जीवन प्रवाह ढूंढना। जीवन-प्रवाह ही हम सभी को दिशा देता है। यह समृद्ध और अवर्णनीय होता है। भाषा इसकी व्याख्या नहीं कर सकती

कोई प्रतिरोध नही, कोई विरोध नही, कोई जबरदस्ती नही! आप ध्यान के दौरान क्या महसूस करते हैं, यह महत्वपूर्ण नहीं है। चाहे आप किसी भी अवस्था में हों, ध्यान आपके लिए हमेशा उपलव्य होता है। आपका ध्यान सत्र कैसा होना चाहिए, जब आप इस पूर्वधारणा से मुक्त रहते हैं, तब आप अपने केंद्र में होते हैं। किसी निर्णय पर पहुंचे, बस आप अवलोकन कर रहे होते हैं।

अगली बार जब आप एक विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण ध्यान सत्र कर रहे हों, तब नकारात्मक विचारों को खुद को घेर लेने दीजिए। उन्हें पूरी तरह महसूस कीजिए। मान लीजिए कि वे अस्थायी हैं। सोचिए कि वह मन द्वारा पैदा किया गया भ्रम है।समझिए कि विचारों से जुड़ाव ही हमारे दुख का कारण है। यही वो भाव है, जो आपको मुक्त करेगा।

☑️खुद से पूछकर देखें !!

• वास्तव में, इस सोच के पीछे क्या कारण है।
• यह विचार कौन कर रहा है?
• मैं हर समय यही क्यों सोच रहा हूं?
• क्या यह विचार सही है।

जितनी गहराई से आप हर विचार के बारे में सवाल पूछेगे, उनसे पीछा छुड़ाना उतना ही आसान हो जाएगा।आप एक बार वास्तव में जब बिना भय और बिना दूसरी ओर देखे, इन सवालों की तह में जाएंगे, आपका ध्यान सत्र परिणाम देने वाला होगा। इस तरह, आप ऐसे मसलों से निपट पाएंगे। बड़े दिल और खुले दिमाग से। जीवन प्रवाह आपको स्वाभाविक रूप से इस बिंदु तक ले आएगा। यह आपके ऊपर है कि आप सवालों की जड़ तक पहुंचना चाहते हैं या नहीं।

बाधाओं का सामना..??

🛑अगर आपको ध्यान के दौरान बहुत ज्यादा बाधाएं आ रही हैं, तो उनका सामना करने के कई तरीके है। मेरा सुझाव है कि हर चीज को वैसे ही होने दें, जैसी वह है। मन के साथ लड़ने की बजाय विचारों को सहज रूप से आने और जाने दें। विचार जैसे है, उन्हें उसी रूप में देखें, इससे ज्यादा कुछ नहीं। जब आप मन में पैदा होने वाले हर विचार पर प्रतिक्रिया देते हैं, तो पीड़ा बढ़ जाती है। जब मन किसी विचार से चिपक जाता है, तो उस विचार से पीछा छुड़ाना बहुत ही मुश्किल हो जाता है। जब आप इस स्थिति में होते हैं, तो ऐसा लगता है कि आपका मन चीजों को दोहरा रहा है। एक ही विचार बार-बार आता है, समाप्त ही नहीं होता। ऐसी स्थिति में आपको यही करना है कि यह विचार जैसा है, उसे उसी रूप में देखिए।

☑️पसंद आपकी है !!

प्रक्रिया का आनंद लीजिए ध्यान एक सतत प्रक्रिया है, जो जीवन भर चलती है। जितना आप यह सीखते हैं कि ध्यान की धारा के साथ कैसे बहा जाए, पूरी प्रक्रिया उतनी ही आसान होती जाती है। ध्यान का कोई लक्ष्य या पुरस्कार नहीं होता। ध्यान बस आपको वर्तमान क्षण में होने के लिए निमंत्रित करता है। इसीलिए आप ध्यान करते हैं। वास्तविकता और अंतःकरण को जानने के लिए। आध्यात्मिकता आपको उस गुरु की पहचान करना सिखाती है, जो आपके अंदर ही है। जिसे आप बाहर खोजते रहते हो। यम, नियम, दर्शन, प्रपंच मे उलझ जाते हो। सिद्धियों के मायाजाल मे पड़ जाते हो !!

⚫चाहे आप ध्यान में नए हाँ या हजारों घंटे ध्यान का अभ्यास कर चुके हों, आपको बहुत जल्दी यह बात अनुभव कर लेनी चाहिए कि ध्यान बस वर्तमान क्षण को देखाना है। ध्यान में खुद पर किसी चीज को थोपना गलत कदम है। जब ध्यान कर रहे हों, तो किसी तय चीज के बारे में न सोचें या किसी ट्रिक का इस्तेमाल न करें। ध्यान में केवल वर्तमान क्षण होता है।

⚫बस इतना ही। यह बहुत सरल है। जीवन सरल है। अध्यात्म सरल है। कुछ लोगों ने अपना ऊल्लू सीधा करने के लिए इसे बहुत उलझा दिया है। आगे जानेंगे एक एक कर तीन नियम?

☑️तीन नियम..??

1. हम जो है, वैसे ही रहे। हमें खुद को इस बात की छूट देनी चाहिए कि हम जैसे है, दूसरों के सामने वैसे ही बन कर रह सकें। हमारे सुर, हमारी कला, हमारी बातें किसी भेड़ चाल का हिस्सा नहीं होनी चाहिए। हम खुद को वैसा बनाएं, जैसा खुद को देखना चाहते हैं। विचारक रूमी कहते हैं, मैं पक्षियों की तरह गाना चाहता हूं। इस बात से बेपरवाह कि कौन सुन रहा है या क्या सोच रहा है।’हमे दोहरा चरित्र जीने से बचना चाहिए।

⚫ 2. सबसे आगे पहुंचने के लिए सबसे ज्यादा चलना भी पड़ता है। जो सब कर रहे हैं, उतनी ही कोशिश करना, वहीं तक ले जाता है, जहाँ सब पहुंच पाए हैं। कई बार हम केवल इसलिए रुक जाते हैं कि उस रास्ते पर हम अकेले होते हैं। सपनों की राह में हमें देर तक टिके रहना होता है। कहा गया है कि जिस जगह कोई नहीं पहुंचा है, वहीं सफलता के मौके सबसे ज्यादा होते हैं।

⚫ 3. आपनी बात ऊपर करने के लिए हम एक के बाद एक बात गढ़ते चले जाते है। सही बात समझ आने के बावजूद उसे मानना हमारे लिए मुस्किल होता है। दूसरों को ही नहीं, हम खुद को भी सुनना-समझाना नहीं चाहते। वापसी, हमारे लिए कठिन होती है, हमें अपनी हार का एहसास कराती है। बिजनेस कोच ब्रायन ट्रेसी कहते हैं, ‘स्वीकारना एक साहस है, जो हमें डर से बाहर निकालता है।’सत्य सदैव अभय होता हैं !! याद रखें यह सूत्र।***

!! धन्यवाद !!

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