556/☑️#देश_स्टेशन की चाय नही हैं‼️

🛑कलयुग मे माफी मांगने का तरीका भी बदला। प्रचार प्रसार प्यार माफी ज्ञान गाली रोना धोना सब मीडिया के कैमरे मे। अपने कारनामों से अत्यन्त प्रसिद्ध हुआ हिटलर यदि आज के समय मे होता तो खुद अपनी फांसी भी कैमरे के सामने लगाता! जनता को जागरूक करता कि दुनियां देखे और सबक ले हिटलर का अन्त ! फिर कोई हिटलर ना बने!

🔘सत्तासीन सरकार ने माफी तो मांग ली; किन्तु गरूर बरकरार! पिघला भी तो एक छटाक। देश को समझ नही आया आखिर किस गलती की माफी। कानून तो आप लाए किसानों को पसन्द नहीं आया आप उसी समय हटा सकते थे। सभी विपक्ष के साथ किसानों ने विरोध किया था। अब एक साल और लगभग 700 किसान की शहादत  किसान जवान और जनता की हड्डी पसली तोड़कर माफी मांगते हैं वो भी कैमरे पर वो भी किससे कमरे से; किसान से या जनता से। आम जनता तो किसी तरह 2 जून की रोटी के जुगाड़ मे व्यस्त हैं उसे कहां फ़ुरसत हैं जो देश के नाम संदेश देख पाए। वो पहले भी भुगत चुकी हैं।

🔘कृषि कानून (जो कोरोंना काल मे जल्दीबाजी मे किसानों पर थोपे गए) को  वापस लिया। ये सब तो ठीक हैं किन्तु ये भी अपनी जनता को बताये एक साल से चल रहे किसानों और त्राहिमाम करती पीड़ित जनता का क्या भला किया। सबकुछ तो वैसे ही हैं। अनैतिक दोहन, साजिश, अपने लोगों का बड़बोलापन आदि। आपने तो मजदूर, किसान, मध्यमवर्ग नौजवान, दुकानदार, छोटे व्यापारी सबके रोजगार चौपट कर दिए। सबका चक्का जाम कर दिया। जिसके पास खाना नहीं हैं उससे आपने मास्क के नाम पर चालान लिया पूरे 2000/ का।

🔘जिन्होंने किसी तरह सेकेंड हैंड गाड़ी या कर्ज से गाड़ी खरीदी थी और किसी तरह घर चला रहे थे उनसे वसूला 10,000 या ज्यादा का चालान। उनकी आत्मा से जाकर पूछो साहेब, कैसे भरे होंगे कैसे चक्कर काटें होंगे। खैर छोड़िए फेहरिस्त बहुत लम्बी हैं। आप चाँद पर महल बनाने की तैयारी करें। अमेरीका और चीन आज भी सपने देख रहे हैं आप भी देखों। देखने दिखाने का आपका अधिकार भी हैं और शक्ति भी। रही बात आपके तपस्या की तो तप एकान्त मे, निर्जन स्थान पर या गृहस्थ धर्म का पालन सेवा करते हुए किया जाता हैं। घर परिवार पत्नी का त्याग कोई तप नहीं हैं सिर्फ तुच्छ महात्वाकांक्षा और विकृत मानसिकता के अलावा कुछ भी नही।

🔘राजनीति मे अपराधी तत्व बैठे हैं उनकी सफाई कितनी हुई। बढ़ते सरकारी ख़र्चे, नेताओं के बढ़ते वेतन, तरह-तरह के भत्ते, पेंशन, अन्य लाभ, प्रचार तंत्र पर करोड़ों खर्च हो रहे जनता के पैसे और भी बहुत कुछ हैं जिसका जबाब देना होगा। जिन्होंने अपने तन मन और धन से कुर्बानी दी; साजिशों के शिकार हुए। अपने लोगों को खो दिए। किसानों की एमएसपी आदि।

🔘साथ मे ये भी जानना होगा इस अहंकार के पीछे वो कौन से बड़े लोग हैं जो खड़े थे। जिससे आपकों एक साल बाद अक्ल आयी। भोले बाबा..किसान; आम जनता मूर्ख नहीं हैं। ये स्टेशन की चाय नही हैं! ना ही हवाई सैर हैं। विशाल देश हैं यहां मज़ाक बनाना; झूठ-जुमले फिर माफी नही चलती।

देश का संविधान गीता की तरह हैं जिसकी कसम सरकार और तंत्र खाती हैं। विशेष पदों पर बैठे लोग यदि असत्य का सहारा लेते हैं तो यह अपराध की श्रेणी में आता है। अपने अंधभक्तो से सदैव सावधान रहें। क्योंकि इतिहास गवाह हैं अंधभक्त ही गुरुओ के दुर्दशा का कारण बनते हैं।***

!! धन्यवाद !!

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