825/☑️#पहचान‼️

🔴#हे_मानव! तुम शहंशाह थे और हो! जिसके आगे दुनियां ही नही अपितु स्वर्ग के राजा इन्द्र की पूरी सल्तनत झुकती थी। नतमस्तक होती थी! किन्तु! आज स्वार्थ एवं लालच मे आकर तुमने अपनी क्या हालत बना ली?—

🎯जब हाथ फैला कर मांगते हो तो भिखमंगें!
🎯किसी को कुछ देते हैं तो अहंकार आता हैं¡ अपने को दाता या मालिक समझ बैठते हो!
🎯जब अपने जमीर को बेचते हैं तो वैश्या को शर्मसार कर देते हो!
🎯जब इंसानों का खरीद-फरोख्त करते हो तो -शुद्ध व्यापारी!
🎯जब किसी को ठगते हैं तो-लालची!
🎯जब किसी के आगे दुम हिलाते हैं तो-चाटुकार!
🎯अपने फायदे के लिए जब किसी की हाँ मे हाँ मिलाते तो-चमचा!
🎯मौका देखकर जो पाला बदल ले या कीमत बढ़ा दे; फायदा उठाए- मौकापरस्त!
🎯जब सिर्फ अपनी मनमर्जी चलाते हो तो-तानाशाह!
🎯जब गिरगिट की तरह रंग बदलते हो तो-मक्कार!
🎯रिश्वत लेते हो तो-रिश्वतखोर!
🎯हराम का खाते हो तो-हरामखोर!
🎯मिलावट करते हो तो-मिलावटखोर!
🎯मेहनत से काम नहीं करते तो- कामचोर!
🎯किसी से छल करते तो- धोखेबाज!
🎯दो तरह की बातें करते तो- दोगले!
🎯असत्य भाषण करते तो- झूठे!
🎯सत्ता का नशा हो तो-सत्तानशी!
🎯आश्वासन देकर काम नहीं करते तो- जुमलेबाज!
🎯किसी का अहसान नहीं मानते तो- अहसानफरोश!
🎯ऐसे ही चालबाज, लुटेरा, बलात्कारी, बेईमान, चोर, पाखण्डी आदि और भी बहुत से विशेषण हैं जिनसे वर्तमान मे इंसानों का महिमामंडन होता हैं! जिसे हम अपनी शान समझते हैं! कसीदे पढ़ते हैं!

⚫#इसमे_से_क्या_हो? क्या यहीं मनुष्यों की पहचान हैं! ऐसा तो जानवर भी नहीं करते? क्या पैसा, पद, रसूख, धंधा इतना महत्तवपूर्ण हैं! उस पैसे से एक साँस खरीद कर दिखाओं! ईश्वर यदि वायु, जल वापस ले लें तो साँस लेकर या बोतल मे भर कर दिखाओं! नाहक इतना गुमान हैं! जीवन भर जो सुख-सुविधाएं; धन-सम्पति इजाद करते हो उसके लिए कितना श्रम और तिकड़म करते हो क्या मृत्यु के पश्चात वैसे ही सब मिलेंगा! कभी फ़ुरसत मे शान्त होकर विचार करना! क्या ईश्वर ने हमें-तुम्हें इसी लिए भेजा हैं! क्या कभी ख्याल आया कि आगे की गति क्या होगी या फिर खाया-पीया; ऐसों-आराम किया और खाली हाथ चलते बने! दुनियां ये बोलें! हाँ, बहुत बड़ा आदमी था; दस-बीस हजार करोड़ का मालिक था, हज़ारों कारिंदे नौकर-चाकर सुरक्षा के बीच रहता था! गौशाला, धर्मशाला, मठ-मंदिर, आश्रम का संस्थापक, बड़ा धन्नासेठ था! नेता-अभिनेता या मंत्री था! अरबों मे खेलता था! बड़ी तूती बोलती थी! शाम तक ठीक था रात्रि को अचानक दो नंबर की सीढ़ी से पैर फिसला और ईश्वर को प्यारा ही गया! कारण कुछ भी हो सकता हैं! डॉक्टर ने बहुत बचाने की कोशिश की फिर भी बचा नहीं! चला गया बेचारा! मृत्यु ढ़ोल पीटकर नहीं आती! काहें का इतना पसारा, मुनाफा; भाई! काहें का प्रपंच! दुनियादारी का चश्मा पहने ये बात अभी समझ मे नहीं आएगी और जब समझने लायक होगे हाथ पैर झूलने-हिलने लगेगा! सभी कर्म एक के बाद एक करके सामने आयेंगे! मृत्यु भी आसानी से नहीं आएगी; बोलेगी, पड़ा रह और बेसुध अंगों को हिलाता और देखता रह! लंबी उम्र की कामना की थी ले तुझे लंबी उम्र दिया! आज कई ऐसे बड़े राजनेता अभिनेता हैं जिनके पैर कब्र मे लटके हैं! मुह से बोल नहीं पाते! कभी वो भी फ़िल्मों मे या राजनीति मे सड़कों पर तहलका मचाते थे आज उन्हें कोई पूछने वाला नहीं!°°°

*༺☀️ॐ✴️~नमो_परमात्मनें~✴️ॐ☀️༻*
°°°•••✳️॥>!धन्यवाद!<॥✳️•••°°°

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