830/☑️#एक_छोर पकड़ लों‼️

🔴#हर_एक_मानव_स्वं_मे शिव; राम; कृष्ण, बुद्ध; कबीर, मोहम्मद, ईसामसीह, गुरुनानक आदि का ही रूप हैं! जिन्हें हम भगवत, ईस्ट या गुरू रूप कहते हैं! उनमे तुममें कोई फर्क नहीं! जितनी बुद्धि और क्षमता उनमें थी वही सब हर एक मानव मे हैं! उन सभी ने अपनी क्षमता का विकास किया सत्य की खोज की और पहुंच गए! आप माखन-मलाई, तू तू मैं मैं मे मे फंस कर लटक गए! वो सभी अपने को जानते थे! ईश्वरत्व की प्राप्ति एवं सत्य जानने हेतु उन्होंने स्वतः तप एवं जीवनपर्यंत कठोर संघर्ष किया था! फिर जाकर उन्हें ज्ञान हुआ! समस्त जीवों मे मानव उस अज्ञात अनाम परमपुरुष एवं उसके सद-प्रकृति की सबसे उत्कृष्ट रचना हैं! भाव-अभाव से रहित स्वं मे सन्तुष्ट! स्वं ही गुरू और एक अच्छा शिष्य भी हैं! सर्वसमर्थ हैं! उसे किसी बाह्य गुरू की आवश्यकता नहीं! हाँ; यदि माखन-मलाई के साथ नौटंकी वाली भक्ति चाहिए तो बात अलग हैं!

🔴#अपने_को_पहचाननें_की_कोशिश करों! इस सभी रूपों मे तुम ही थे! तुमने स्वतः खोज की थी और पहुंच गये! तुम्हें किसी की आवश्यकता नहीं! सारा जगत ही गुरू हैं! सत्य व परोपकार को आत्मसात करों! उसी की पूजा करों! उसे अपने जीवन मे उतारों! झूठ, मक्कारी असत्य आदि का त्याग करों! भ्रम, लालच, दिखावा एवं प्रचार से बचों! अपनी पूर्व मे की गई गलतियों पर दृष्टिपात करों? उसे दूर करने की कोशिश करों! अपने दुःख खुद हरने की कला सीखों! अन्य कोई तुम्हारा दुःख नहीं हर सकता! जब तक ये कला नहीं सीखते दुनियां तुम्हें अनेकों उपायों से ठगती रहेगी! नित नये-नये उपाय और नियमों के मकड़जाल मे फंसाती रहेगी! टोटके बताती रहेगी! ऐसे करों तो ये होगा वैसे करों तो वो होगा आदि! तुमसे हफ्ते-महीनें अपने दरबार मे देव-देवी भगवान के नाम पर हाजिरी लगवातीं रहेंगीं! कितना भी कमाओ फिर भी दुःखी के दुःखी ही रहोगे! पैसा, रुपया ऐश्वर्य अपार होते हुए भी वो भी सदैव दुःखी ही रहेंगे जो इस तरह के उपाय और बेहूदी सिद्धियों का प्रचार करते हैं! तमाम तरफ के उपाय बताकर लोगों को कर्म के मार्ग से भ्रमित कर धर्म के नाम पर पाखण्ड और चढ़ावे को प्रोत्साहित कर भ्रमित करते हैं! त्रिशूल की पूरी नजर हैं ऐसे बाबाओं पर!

#ज्यादा_कथा-कहानियां, वेद-पुराण, कुरान पढ़ने, रटने, सुनने की आवश्यकता नहीं! सिर्फ विश्वास एवं धैर्य के साथ भगवत नाम का एक छोर या कथा कहानियों से अपने मनपसंद की कोई एक वाक्य पकड़ लो और चलते रहो! आगे की कड़ियां स्वतः जुड़ती जाएंगी! अपने गृहस्थ धर्म के कर्तव्यों का ठीक से पालन करते रहो! पूरी ईमानदारी से सांसारिक कार्य करने की कोशिश करों! अच्छी एवं अनुकूल विचार जहां से मिले उठा लो! यात्रा शुरू कर दो! कई बार गलती होगी! चोट लगेगी! गिरना होगा! पुनः अपने को हौसले के साथ सम्भालों! गलतियों को दुरूस्त करों! अपने दुःखडे़ का रोना हर समय सबके सामने मत रोओं! ईश्वर सब देखता हैं! हर वक्त तुम्हारे साथ हैं! तुम सो जाते हो वह कभी नहीं सोता! निरंतर तुम्हारे साथ तुम्हारे हर कृत्य पर नजर बनाए रहता है! उसे मालूम हैं तुम्हारे लिए क्या आवश्यक हैं! चिंता नहीं अपितु शान्ति से विचार मनन और चिंतन करों! समय से साथ मंजिल तक अवश्य पहुंचेगे! तुम्हें पूरी रामायण-गीता-भागवत, वेद-पुराण, कुरान का ज्ञान बिना पढ़े-सुनें हो जायेगा और साथ मे समस्त दुःखों से छुटकारा भी!°°°

*༺☀️ॐ✴️~नमो_परमात्मनें~✴️ॐ☀️༻*
°°°•••✳️॥>!धन्यवाद!<॥✳️•••°°°

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