878/☑️#एकान्त_व दान‼️

🔴#यदि_किसी_कारण_मन मे वैराग्य आये तो घर व अपने दैनिक कर्तव्य से मत भागों बल्कि घर मे रहते; अपने शारीरिक कर्तव्यों का पूरे मनोयोग से पालन करते हुए मन के एकान्त मे प्रवेश करने की कोशिश करों! इसके लिए किसी भी प्रिय भगवत नाम का सहारा ले सकते हैं! नाम की शक्ति ही तुम्हें घर मे रहते हुए; धीरे-धीरे पक्का कर मन के एकान्त मे प्रवेश दिलाएगा! सदैव ध्यान रहें आध्यात्म मे जल्दीबाजी उचित नहीं! धैर्य व विश्वास की आवश्यकता होती हैं! उसी तरह यदि धन या किसी वस्तु का दान करने का विचार आए तो उसे ऐसे जरूरतमंद को दो जिसे उसकी उस समय आवश्यकता हैं! पंडित: पुजारी; बाबाओं का पेट वैसे ही फुल रहता हैं उन्हें दान देने से कोई लाभ नहीं होगा! हमारे भारत मे चलते-दौड़ते सिक्के पर ही सब दाव खेलते हैं! भीड़ जिधर देखी उधर चल देते हैं! यह उचित नहीं! कभी उनकी भी फिक्र करों जो असल हकदार व पात्र हैं! कुछ लोग बड़े-बड़े भंडारे करते हैं; लोगों को खाना खिलाते हैं; फोटो खिंचवातें हैं; प्रचार करते हैं किन्तु एक मैला कुचैला भूखा अचानक सामने आ जाय तो उसे दुत्कार कर भगा देते हैं! दरवाज़े पर आए या रास्ते चलते मिले एक साधारण साधु को भोजन या कुछ उसके खुद के जरूरत की वस्तु नहीं देते! ऐसे लोगों को क्या हासिल हुआ? ध्यान रखें सेवा खोजकर या प्लान करते नहीं करनी चाहिए! सेवा आकस्मिक आ जाती हैं उस समय कोई चूक नहीं होनी चाहिए! नफा नुकसान से हटकर अपने सामर्थ्य-नुसार सेवा या दान करना चाहिए! नहीं कर सकते तो कम से कम क्षमा सहित प्रणाम या ईश्वर से प्रार्थना तो कर ही लेना चाहिए कल्याण होगा !!!°°°

मांग हैं तो मन्दिर; मस्जिद; गुरुद्वारा; चर्च
जाने की आवश्यकता होती हैं किन्तु
मांग नहीं हैं तो जहां हो वही चारों हैं!
सिर्फ याद कर लो; प्रणाम कर
लो! काम बन जायेगा !!°°°

जो दूसरों के लिए कुआं खोदता हैं;
मौका-देखकर टांग खींचता हैं; उसे
गिराने का उद्योग करता हैं;
वो कभी कामयाब नहीं होता!
प्रकृति उसकी दोनों टांग तोड़ने
के लिए खाई पहले ही तैयार
रखती हैं !!!°°°

जिस दिन खोखले ज्ञान पर ताली
बजाना छोड़ दोगे; उसी दिन आध्यात्म
की पहली सीढ़ी चढ़ जाओगे!
ताली बजाकर तुम अपना नुकसान
कर सामने वाले का
विकास कर देते हो !!°°°

देश का दुर्भाग्य हैं यहां राष्ट्रपति व गवर्नर को
रबर स्टैम्प की तरह प्रयोग किया जाता हैं!
बहुसंख्यक जनता को साधने के लिए
बहुमत की सरकार द्वारा एक डेड चेहरा
खड़ा किया जाता हैं! वो फिर चाहें दलित;
मुस्लिम या कुछ और हो! ऐसों को
राष्ट्रपति बनाने से अच्छा हैं मंदिर के किसी
मूर्ति या रोबोट को राष्ट्रपति और गवर्नर
की जगह बिठा दों! देश का पैसा और
उनपर खर्च होने वाले तमाम संसाधन बचेंगे!
वैसे भी तुम्हें मूर्तियों से ही ज्यादा प्रेम हैं
जिंदों से नहीं! अपनें को पानी देते नहीं;
मरने के बाद दुनियां भर की धार्मिक नौटंकी
शुरू करते हो? बदलों स्वं को..
नहीं तो.. !!!°°°

*༺⚜️꧁✴️‼️ॐ#शिव#ॐ‼️✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>!धन्यवाद!<॥✳️•••°°°

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