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516/☑️दाद, खाज, खुजली को करें जड़ से ठीक‼️

🛑दाद (टिनीया- Tinea) में त्वचा पर परतदार गोल और लाल चकत्ते दिखाई देते है। इसमें खुजली एवं जलन होते है। त्वचा में अतिरिक्त शुष्कता, त्वचा विकार खुजली के कारण होता हैI यह वयस्कों में आम है, क्योंकि उनकी त्वचा उम्र के साथ सूखने लगती है। खुजली के कारण के मुताबिक त्वचा सामान्य, लाल या खुरदरी दिखाई दे सकती है। बार-बार खुरचने से त्वचा पर चकत्ते आ सकते हैं जिनसे निकल सकता है या वह संक्रमित हो सकते हैं।

🛑त्वचा विकार जैसे एक्जिमा, सोरायसिस, चकत्ते निकलना, फंगल या बैक्टीरियल इन्फेक्शन्स, एलर्जी, शीतपित्त आदि कारणों से खुजली हो सकती है जो पूरे शरीर या किसी खास हिस्से में हो सकती है I गर्मियों के पसीना ज्यादा निकलता है इसके देर तक त्वचा पर बने रहने से बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिससे खुजली का एहसास होता है। गले, कमर, बगल और जाघों के बीच में खुजली ज्यादा होती है, क्योंकि यहां पसीने का जमाव ज्यादा होता है। आयुर्वेद के मतानुसार पित्त और प्रधान रूप से कफ की दुष्टि से खुजली लक्षण उत्पन्न होता हैI हालांकि, कारण के अनुसार खुजली की चिकित्सा भी विशेष होती है, दोस्तों, नीचे कुछ सामान्य उपाय बताए जा रहें जो खुजली कम करने में असरदार है।

1. किसी नजदीकी आयुर्वेद विशेषज्ञ से परामर्श ले के पंचकर्म के वमन, विरेचन, बस्ती और रक्तमोक्षण उपक्रम करे जिससे शरीर से विषैले तत्व बाहर निकल जाते हैं।

2. बेकिंग सोडा : हल्के गर्म पानी से बाथटब भर लें और इसमें आधा कप बेकिंग सोडा मिला लें। लगभग १५ से २० मिनट तक इस पानी में शरीर को डुबोए रखें। रोजाना इस पानी से स्नान करने से बेकिंग सोडा में मौजूद एंटीफंगल और एंटी बैक्टीरियल गुण खुजली को कम कर त्वचा को आराम पहुंचाते हैंI

3. तुलसी एंटीमाइक्रोबियल और एंटीइंफ्लेमेटरी गुणों से समृद्ध है जो खुजली से संक्रमित त्वचा को आराम देने का काम करती हैI इसके लिए तुलसी की ताजी छह-आठ पत्तियां ले I इन्हे पीसकर पेस्ट बना लें और प्रभावित क्षेत्रों पर लगाएं। २-३ बार लगाने से कुछ दिनों में खुजली कम हो जाएगी I

4. रोजाना दिन में दो-तीन बार एलोवेरा जेल का इस्तेमाल करन भी खुजली कम करने का कारगर तरीका है I एलो वेरा के एंटी एलर्जिक, मॉइस्चरीसिंग गुणों के कारण यह खुजली, जलन, शुष्कता को कम कर त्वचा को उचित पोषण भी देती है I

5. नीम त्वचा विकारों के लिए अत्यंत उपयुक्त है I नीम के पत्त्ते, बीज का तेल इसके लिए उपयोग में लाये जाते है I नीम की पत्तियों की पेस्ट बनाकर प्रभावित स्थान पर लगाए या नीम तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैIनीम की पत्तियां पानी में उबालकर रोज नहाने लिए इस पानी का उपयोग करेI नीम एंटी माइक्रोबियल, एंटी ऑक्सीडेंट होने से त्वचा संक्रमन को दूर करने में मदत करता है I

नीम घन वटी या नीम चूर्ण का सेवन करना खून को साफ कर शरीर को ठंडा रखने में मदत करता है I

6. नारियल तेल में स्थित लोरिक एसिड एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीमाइक्रोबियल गुणों से युक्त है। नहाने के बाद शरीर को पूरा सूखा ले और फिर जरूरी जगह पर नारियल तेल लगाए I इसमें कपूर मिलाना फायदेमंद है I

7. मेथी के बीज अपने एंटी इंफ्लामैंट्री और एंटीमाइक्रोबियल गुणों के चलते रैशेज को ठीक करते हैं।
मेथी के बीजों को एक घंटे के लिए पानी में भिगो दें। फिर इन्हे थोड़े से पानी के साथ पीसकर गाढ़ा पेस्ट बनाएं। इस पेस्ट को खुजली से प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं। पेस्ट सूखने पर त्वचा को पानी से धो लें।

8. बाहरी चिकित्सा के साथ रक्त शुद्धि के लिए नीम, त्रिफला, हरिद्रा, मंजीठ, गिलोय जैसी उपयोगी औषधियों से बने गंधक रसायन, आरोग्यवर्धिनी रस, मंजिष्ठादि काढ़ा, कैशोर गुग्गुलु आदि योगों का चिकित्सक की सलाह से प्रयोग करे I

🛑इसके अतिरिक्त डॉ वैद्याज का डर्माहर्ब इन्ही उपयुक्त औषधियों से बना विभिन्न त्वचा विकारों में लाभदायी योग है I यह त्वचा की खुजली, जलन को दूर करने में फायदेमंद है। भी प्रयोग कर सकते हैं।

खानपान में उचित बदलाव खुजली जैसे त्वचा विकारों को कम करने के लिए जरूरी हैं। क्रासोबियम (CHRYSAROBINUM 30) का प्रयोग भी लाभदायक हैं।

!! धन्यवाद !!

515/☑️आज के साहबजादें‼️

🛑यद्यपि अब सीन बदल चुका हैं नयी फिल्म मार्केट मे आ चुकी हैं। लोग उसे देखने मे व्यस्त हैं। घटनाक्रम तेजी से बदल रहा हैं। पर आज बात करेंगे पिछले कई दिनों से मीडिया में छाए दो शहजादों की। एक प्रसिद्ध अभिनेता का बेटा और दूसरा प्रसिद्ध नेता केंद्रीय गृहराज्य मंत्री का सुपुत्र। एक पर क्रूज पर ड्रग का मामला है और दूसरे पर आरोप है कि उसने अपनी गाड़ी से कई किसानों को कुचल दिया। कुचलने की घटना के बाद आक्रोशित भीड़ ने कुछ लोगों को पीट-पीटकर मार डाला, इस पूरी घटना से देश स्तब्ध है। दोनों साहबजादे के बारे में सोचें, तो लगता है कि आखिर ये दोनों बड़े ताकतवर व्यक्तियों के बच्चे हैं। पैसा और पावर की कोई कमी नहीं। ऐसे ही लोगों को इन दिनों रोल मॉडल भी बताया जाता है। उसमे से एक के धन के घमंड को उसके वकील ने अदालत में बयान किया कि वह चाहे, तो पूरा क्रूज खरीद ले और दूसरा बड़े आराम से इंटरव्यू दे रहा था। इतने लोग मारे गए। इतनी दर्दनाक मौतें, और चेहरे पर शिकन तक नहीं। ऐसा कुछ क्यों नहीं सिखाया गया, जिसे दूसरों के दुख में दुखी होना या शर्मिंदा होना कहते हैं या विनम्रता कहते हैं। क्या इन दिनों अच्छे संस्कार दिए ही नहीं जाते हैं? इन्हें पुरानी बातें कहकर किनारे कर दिया जाता है। इन मामलों में यह कहावत बहुत चरितार्थ होती दिखती है- पूत कपूत तो क्यों धन संचय, पूत सपूत तो क्यों धन संचय।

🛑इन दिनों अपने-अपने उत्पाद बेचने के लिए अहंकार
को एक पॉजिटिव वैल्यू की तरह युवाओं, किशोरों के बीच परोसा गया है। इसे ‘एटीट्यूड’ और ‘स्टाइल स्टेटमेंट’, ‘यूनीकनेस’ आदि कहा जाता है। एक तरह से सारे नकारात्मक मूल्यों को जीवन का हिस्सा बना दिया जा रहा है। हर बात में जाति-धर्म को ले आने के कारण भी अपराधी को बचाने के हजार मौके ढूंढ़ लिए जाते हैं। कई लोग तो कहने लगे हैं कि दोनों (अभिनेता और राजनेता) पिताओं को उनके धर्म और जाति के कारण निशाना बनाया जा रहा है। सोचा तो गया था कि पहचान की राजनीति लोगों को मजबूत करेगी। लोकतांत्रिक मूल्यों में लोगों की आस्था दृढ़ होगी, लेकिन हो इसका उल्टा रहा है। अपराधी की जाति या धर्म सामने आते ही अपनी-अपनी जाति धर्म वाले उसकी रक्षा में कूद पड़ते हैं और कहने लगते हैं कि किसी विशेष धर्म या जाति का होने के कारण अमुक को परेशान किया जा रहा है।

🛑सच तो यह है कि ड्रग्स और तरह-तरह के नशे का
कारोबार इन दिनों फैशन में है। युवा अपने संगी-साथियों
से पूछते पाए जाते हैं कि वे ड्रग्स लेते हैं या नहीं? जो नहीं लेते, उन्हें पिछड़ा मान लिया जाता है। पहले जो बातें सिर्फ अमीरों, मशहूर लोगों के बारे में सुनी जाती थीं, अब उनकी धमक मध्यवर्ग और गरीब तबकों के बीच भी सुनी जा रही है। दुख की बात है कि यह कारोबार बहुत से स्कूलों से होता हुआ किशोरों तक जा पहुंचा है।

🛑अडानी एयरपोर्ट पर ताजा मिले करोडों का ड्रग्स और उससे पहले भी आए खेपों का क्या होगा सब समझ सकते हैं। सरकार चुप हैं। सब मिले हुए हैं। देश और युवाओं को नशे की लत मे झोंकने के लिए। देश को बर्बाद करने मे पूंजीपति से लेकर सत्ता तंत्र तक सभी शामिल हैं। पैसा चाहिए। आज मानवीय मूल्यों की कोई कीमत नहीं?

🛑इसकी वजह खोजने चलें, तो आप पाएंगे कि इन दिनों बहुत सारे माता-पिता के पास बच्चों पर ध्यान देने का समय नहीं है। वे अपने ही सुख-संचय में लीन हैं। संस्कारों की बात आते ही जो लोग नाक-भौं सिकोड़ते हैं, उन्हें जानना चाहिए कि बच्चे को जो बातें बचपन में सिखाई जाती हैं, जैसे रहन-सहन, खान-पान, बोलचाल, पढ़ने के प्रति रुचि, वह ताउम्र बनी रहती है। माता-पिता को लगता है, उन्होंने बच्चों का दाखिला किसी नामी स्कूल में करवा दिया, तो उनकी जिम्मेदारी खत्म। बच्चे की शिक्षा और उसके व्यक्तित्व के विकास की सारी पहले जो बातें सिर्फ अमीरों के बारे में सुनी जाती थीं, अब उनकी धमक मध्यवर्ग और गरीब तबकों के बीच भी सुनी जा रही है।

जिम्मेदारी स्कूल की हो गई। जबकि अध्यापक समझते हैं, बच्चे की जिम्मेदारी उनकी तभी तक है, जब तक वह स्कूल में है। घर में या स्कूल के बाहर वह क्या करता है, इसकी जिम्मेदारी स्कूल की नहीं है। इस तरह एक-दूसरे पर जिम्मेदारी थोपकर बचना भी ठीक नहीं है। इन दिनों पाठ्यक्रमों में या युवा संगत मे भी ऐसी बातें देखने को नहीं मिलतीं, जिनसे बच्चों में संस्कार जगाए जा सकें। हाल में दिल्ली सरकार ने अपने स्कूलों में देशभक्ति का पाठ्यक्रम शुरू किया है। यह अच्छी पहल है, पर देशभक्ति यह भी है कि बच्चों-किशोरों को बताया जाए कि वे नशे से कैसे दूर रहें? समाज की कैसे कद्र करें? दूसरों की मदद के लिए कैसे आगे आएं? इसके अलावा, माता-पिता भी बच्चों को सिखाएं: संस्कार दे कि धन और सत्ता का मद किसी काम का नहीं होता। वह दूसरों का नुकसान तो करता ही है, अपना नुकसान भी करता है। काश! दोनों नवाबजादे को भी किसी ने यह सिखाया होता। तो आज ये घटनायें सुर्खिया ना बनतीं। माथे पर कलंक ना लगता। इस लेख पर विचार अवश्य करें।***

!! धन्यवाद !!
                                 

514/☑️मानव धर्म‼️

🛑भारतीय ऋषिमुनियों और चिंतकों के मतानुसार सृष्टि में मानव से अधिक श्रेष्ठ और कोई नहीं। मनुष्य जीवन सृष्टि की सर्वोपरि कलाकृति है। ऐसी कायिक और मानसिक सर्वागपूर्ण रचना और किसी प्राणी की नहीं है। जब एक बार कोई मनुष्य योनि में आ जाता है तो मानवता उससे स्वयं जुड़ जाती है। इसका सर्वदा ध्यान रखना, उससे विलग न होना ही मानव जीवन की सार्थकता है। मानव की प्रतिष्ठा में ही धर्म की प्रतिष्ठा है। मानव को संतृप्त, कुंठित एवं प्रताड़ित करके कोई भी धर्म सामान्य नहीं हो सकता।

🛑इसीलिए संस्कृति राष्ट्रीयता के जनक स्वामी विवेकानंद कहा करते थे, ‘सच्ची ईशोपासना यह है कि हम अपने मानव-बंधुओं की सेवा में अपने आपको लगा दें।’ सदाचार और मानवता की बलिवेदी पर धर्म का प्रचार-प्रसार करना अनैतिक एवं अमानवीय है। जो रोटी को तरस रहे है, उनके हाथों में दर्शन और धर्म ग्रंथ रखना उनका मजाक उड़ाना है। मानवता का विस्तार किसी विशेष परिधि तक सीमित न होकर विश्वव्यापी है। अत: इसका विकास चाहे किसी भूखंड पर हो, किंतु विश्वभर की मानव जाति एक ही है। समानता की इसी भावना को आत्मसात करते हुए हमारे मनीषियों ने कहा-यह सब जो कुछ पृथ्वी पर चराचर वस्तु है, ईश्वर से आच्छादित है।

मानव धर्म वह व्यवहार है जो मानव जगत में परस्पर प्रेम, सहानुभूति, एक दूसरे का सम्मान करना आदि सिखाकर हमें श्रेष्ठ आदर्शो की ओर ले जाता है। मानव धर्म उस सर्वप्रिय, सर्वश्रेष्ठ और सर्वहितैषी स्वच्छ व्यवहार को माना गया है जिसका अनुसरण करने से सबको प्रसन्नता एवं शांति प्राप्त हो सके। धर्म वह मानवीय आचरण है जो अलौकिक कल्पना पर आधारित है और जिनका आचरण श्रेयस्कर माना जाता है। संसार के सभी धर्मो की मान्यता है कि विश्व एक नैतिक राज्य है और धर्म उस नैतिक राज्य का कानून है। दूसरों की भावनाओं को न समझना, उनके साथ अन्याय करना और अपनी जिद पर अड़े रहना धर्म नहीं है। एकता, सौमनस्य और सबका आदर ही धर्म का मार्ग है, साथ ही सच्ची मानवता का परिचय भी।***

!! धन्यवाद !!

513/☑️खोज‼️

🛑वेद, शास्त्र, गीता, उपनिषद, पुराण आदि सिर्फ माध्यम हैं; मार्गदर्शक हो सकते हैं। ये किसी ना किसी शरीरधारी ऋषि-मुनियों-देवों द्वारा लिखी गयी ईश्वरवाणी हैं। वास्तविक सत्य हिडन हैं। कोई जरूरी नहीं जो सत- शास्त्रों मे वर्णित हैं पूर्ण-सत्य हो। अनुभव और लेखनी मे अन्तर होता हैं। लेखन देश-काल के सापेक्ष की जाती हैं। लिखते समय अर्थ थोड़ा परिवर्तित हाने का खतरा भी होता है। लोग अपनी मेहनत से वहां तक पहुंचे यह भी भाव रहता हैं। ज्यादातर भूमिका; नियम और विधियां होती हैं। सत्य तक पहुंचने के लिए स्वतः खोज करनी होगी। सिर्फ मानने से कोई बात पूर्ण नहीं होती। चलना होगा जबतक पूर्ण सत्य सामने नहीं आ जाता। हमारे हिन्दू-मुस्लिम मित्र हो या अन्य कोई धर्म हो; साधू-मौलवी हो या गृहस्थ; गुरू हो या शिष्य: मानते ज्यादा हैं। पढ़ते- रटते हैं और अपनी समझ और बुद्धि से व्याख्या करते हैं। क्योंकि मानने मे परिश्रम नहीं लगता केवल मन का भाव हैं। अपने अनुभव या जिज्ञासा के लिए मित्रों, मेहनत वो भी बिना पारिश्रमिक के करनी पड़ती हैं। वो कौन करें। फिर सत्य कैसे सामने हो। हाँ बीच के रास्ते मे फायदा हैं जिसे सिद्धि- प्रसिद्धि कहते हैं वही लटक जाते हैं। सत्य उतना ही दूर रहता है; बाकी कमी शास्त्र/कुरान के ज्ञान को नमक-मिर्च लगाकर लोगों को परोस पूरा कर लेते हैं। स्वतः भेद-भाव मे बटें ऐसे धर्मज्ञ क्या समाज को सही रास्ता दिखाएंगे। आज जो स्थितियां पैदा हो रही हैं उसका मूल कारण यही हैं। सबको अपने तरीके से फायदा चाहिए। इससे ऊपर उठने मे उन्हें नींद आने लगती हैं।***

!! धन्यवाद !!
                                

512/☑️मेरा भारत महान‼️


*वेदों की खोज से दुनियां के अन्य देश कहां से कहां पहुंच गए!

*उन्हीं वेद-शास्त्रों को रटकर; तोड़-मरोड़ कर हिन्दू मठ- मन्दिर-सम्प्रदाय मे फंसकर भारत मे सिकुड़ गए !!

*फिर भी कहते हैं मेरा भारत महान ; जहां एक आध को छोड़कर ऊपर से-नीचे पूरा तंत्र बेईमान!

*ये हैं हमारा आज का हिन्दुस्तान !!

*ऐसा हैं हमारे अपनों का विशुद्ध ज्ञान !!

*कैसे कह सकते हो मेरा भारत महान!

*सिर्फ एक उपलब्धी तो बताओ;

*जो कहीं और नहीं !!

*हैं ना अजीब’!..??

*बदलना होगा !!!!

*भारत !!

*नहीं तो..

*होगा

*सब

*श्मशान !!! X

*मत कहना अब…

*मेरा..

*भारत

*महान… !!!!!

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*चांद की चाहत मे जब; बेतहाशा भागते हैं!
*अन्धेरे मे अकेला खड़ा;
*कोई शख्स देखता हैं..
*हरकतों को मौन.. !!!

// धन्यवाद //