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840/☑️#रूप ईश्वर समान हैं¡ ईश्वर नहीं‼️

🔴#इस_पृथ्वी_पर_हर व्यक्ति; हर एक जीव! यहां तक कि सभी ग्रह नक्षत्र, चांद सितारे सहित पूरा ब्रह्मांड सभी अपनी -अपनी विभिन्न विशिष्ट प्रकृति और शक्तियां रखते हुए भी भगवत रूप के समान हैं किन्तु ईश्वर या भगवान नहीं! यहां तक कि जहां भी प्रकृति; शक्ति; रूप; आकार का समन्वयन हो जाये वो ईश्वर नहीं! पूर्ण नहीं! यद्यपि कर्म करने की प्रकृति, आकार और रूप की अपनी पूरी स्वतंत्रता होती हैं किन्तु फल पर पूर्ण नियंत्रण सिर्फ अकर्ता एक समान सर्वव्यापक, सर्वसमर्थ ईश्वर की ही होती हैं! नाम चाहें मनुष्य का हो या देव का या कुछ अन्य! सभी ईश्वरीय रूप हैं जो कभी नहीं मरतें!

🔴#राम_कृष्ण_महादेव, देवी माँ, कबीर, मुहम्मदसाहिब, ईसामसीह, गुरुनानक और अन्य भी तमाम धर्मों के गुरू या संस्थापक ये सभी अपने रूप, शक्ति एवं कर्मों से विशिष्ट हैं उस परम सत्ता के अंश मात्र हैं किन्तु परम सत्ता नहीं! एक तरह से इन्हें ईश्वर का दूत, माध्यम या देव कह सकते हैं जो किसी कारण बस उस परम सत्ता जिसे हिन्दू लोग विभिन्न रूपों में भगवान, ईश्वर, परमात्मा  प्रभु, माँ आदि कहते हैं और मुस्लिम लोग अल्लाह आदि कहते हैं वो सभी किसी विशिष्ट कार्य हेतु इस धरा पर जन्म लेते हैं और गुरू या संस्थापक के रूप मे अधर्म के राह बढ़ते या गुमराह हुए समाज को एक नई दिशा एवं दशा दिखाकर अपना कार्य पूर्ण कर शरीर-त्याग उपरान्त पुनः उसी परम सत्ता मे विलीन हो जाते हैं!

#वास्तव_मे_वो_परमसत्ता स्वं मे सर्वसमर्थ किन्तु अकर्ता हैं उसका कोई शानी नहीं! वो आपकी-अपनी प्रकृति या किसी भी रूप को माध्यम बनाकर बल पूर्वक अपने विभिन्न आयोजनों से कर्म के लिए प्रेरित कर एवं विभिन्न घटनाओं को घटित कर ज्ञान देता हैं! ईश्वर विशेष प्रयोजन से अपने अंशभूत प्रकृति को प्रकट करके पृथ्वी पर किसी भी रूप मे जन्म लेता हैं! या किसी को माध्यम या निमित्त बना सकता हैं! हम सब उसी के अंशभूत हैं! मानव जिस किसी प्रयोजन से जिस इच्छापूर्ति के लिए पूजा या आराधना करता हैं उस अभीष्ट की प्राप्ति देर सबेर होती ही हैं! किन्तु वो प्राप्ति कुछ ही समय के लिए होती हैं! इस तरह यदि कहां जाय तो ईश्वरीय सत्ता का कोई भी विशिष्ट रूप सिर्फ एक गुरू की तरह माध्यम मात्र हैं उसे पूर्ण ईश्वर, भगवान, या परमात्मा समझने की भूल नहीं करनी चाहिए! सम्मान सबका करें! किन्तु वही अटके ना रहें! यात्रा को आगे बढ़ाना चाहिए! सिर्फ कथा; कहानी सुनी-सुनाई बातों तक सीमित ना रहकर सत्य का अनुसंधान करें!°°°

*༺⚜️꧁✴️‼️#शिवशरणम#‼️✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>!धन्यवाद!<॥✳️•••°°°

839/☑️#अन्धविश्वास ब..पाखण्ड‼️(अंतिम-भाग)

!! असलियत !!

🔴#सत्ता_सिद्धि_प्रसिद्धि_कोरा_ज्ञान का नशा भी अजीब हैं साहिब? कुछ कंकर पत्थर हाथ आते ही राष्टप्रेम, मातृप्रेम देवप्रेम, ईश्वर प्रेम के साथ ललाट पर चन्दन टीका लगाये दिव्य ज्ञान का उदय हृदय मे तत्काल प्रकट हो जाता हैं? अन्दर न पचने वाला ज्ञान चारों दिशाओं मे नाभिकीय विखण्डन की तरह देश-दुनियां मे प्रचार तंत्र के माध्यम से फैलता ही जाता हैं! चेहरे पर असीम चमक! ज्ञान लबालब! छलक छलक! सर्वत्र मंगल ही मंगल! रिद्धि-सिद्धि का बोलबाला! सामने कुछ और पीछे कुछ और! चारों तरफ खेल ही खेल! किन्तु कब तक जबतक असल ज्ञान नहीं पचने लगता! मन और आदतें अपना भरपूर पसरा नहीं कर लेतीं और फिर अचानक एक दिन ज्ञान जब पचना शुरू होता हैं तो पता भी नहीं चलता कि कब चादर नीचे से सरक सरक गई! मलाई एक ही झटके मे ही निकल ली! बाबाजी, नेताजी, ये जी, वो जी अपने कारनामों से पहुंच गये अन्दर? वक्त कब पलट जाये कौन जानें! इसलिए बेहद्द नहीं हद मे रहना उचित हैं! इन्सानी मर्यादा का उल्लंघन मुश्किलें लाता हैं!

🔴#सिद्धियों_का_सब_खेल मूर्तियों के आगे खेला जाता हैं! जो कि ना बोल सकती हैं ना कुछ कर और कह सकती हैं! चमत्कार से भारत शुरू से जुड़ा रहा हैं! असलियत किसी को दिखती नहीं! सब दुखी हैरान परेशान आंख मूँदे अंधों की तरह भीड़ मे बैठे हैं अपने नम्बर के इंतजार में! कथा और सिद्धि बड़े अच्छे से दिखाया-सुनाया जा रहा हैं! भूत-प्रेत मार-मार कर भगाया जा रहा हैं! लोग बाबा का चमत्कार देख रहे हैं! बाबा मन की बात जान जाते हैं! याचक की समस्याएं लिख देते हैं! नाम तक बता देते हैं! मन्दिर दरबार मे अर्जी लगा देते हैं! आशीर्वाद देते हैं! दरबार मे आते रहो; हाजिरी लगाते रहना; आदेश देते हैं!

🔴#भक्त_की_मुराद_पूरी हुई खुशी-खुशी जयकरें के साथ बिदा होता हैं! दूसरी बोली और अर्जी लगती हैं! उसे कुछ और बताया जाता हैं! सिलसिला चलता ही जाता हैं! सबके दुःख दूर होंगे! मीडिया देश की समस्याओं को दरकिनार कर आधा हकीकत आधा फसाना दिखाकर बाबा का महिमामंडन करने मे लगा हैं! जैकारा लग रहा हैं! बाबा की चमत्कारिक शक्ति-सम्पन्न दृष्टि ना जाने कब पड़ जाये; मेरा भी कल्याण हो जाये! अजीब देश हैं हमारा! जहां हर समस्या का इलाज हैं बाबा! हर व्यक्ति का अपना दुखड़ा हैं! किसी के नौकरी नहीं; किसी को बीमारी हैं! किसी को व्यवसाय मे घाटा तो किसी का राजनीतिक कैरियर दाव पर! ढ़ेरों समस्याएं हैं जीवन मे उपाय सिर्फ एक बाबा! लोग सब दुखड़ा भूल कर हाजिरी पर हाजिरी लगाए जा रहे हैं!

🔴#किसके? बाबा ने कहा मेरे नहीं मूर्तियों के! शक्तियों के! खाली मत आना! बाबा लालच से परे हैं! चढ़ावा मूर्तियों को! बाबा किनारे! निर्लिप्त! चेहरे पर भोलापन का भाव! दिव्यदृष्टि माल पर! चढ़ावा गिना जाएगा तुम्हारे जाने के बाद! मन्दिर! धाम मे; धाम फिर अनेकों आश्रम और सेवा संस्थान मे बदलते देर नहीं लगेगा! यही सब पाखण्ड बचपन से आज तक हम सभी कथा कहानियों मे पढ़ते-सुनते आये हैं! ये सभी बाबा भगवान, मन्दिर, दरबार और धर्म के नाम पर धंधा करते हैं! धर्मान्ध सरकार के वफादार मोहरे हैं! लोगों को जो सवाल सरकार से करना चाहिए वो सभी उपाय इन बाबाओं के पास मिल जाता हैं! ज़माना बदल गया आजकल तो मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधान सभी पर भगवत कृपा ऐसी बरस रहीं हैं कि नारदजी भी शर्मा जाये! भरें जलसे मे ज्ञान भक्ति का प्रवचन संगीत के साथ मधुर स्वर भरे जनसभा और अपने भाषणों में सुनाया जा रहा हैं!

#ये_सब_भी_तंत्र_का_मकड़जाल हैं कुछ समय के लिये  फॉलोवर्स के मध्य पॉजिटिव बातों का एक वातावरण हैं जो उनके इर्द गिर्द निर्माण किया जाता हैं! जहां बैठकर पीड़ित लोगों को कुछ समय के लिये राहत मिलती हैं! किन्तु स्थाई नहीं! हाजिरी लगाते रहो! चढ़ावा चढ़ाते रहो! मंच साझा करते रहो! उनके गुणगान करते रहो! तब-तक सब ठीक! बाकी का आप जानो! मन्दिर की चांदी! बाबा और उनके सेवादारों की चांदी! राजनीति और राजनीतिज्ञों की चांदी! सरकार की चांदी! सांसारिक मोटी बुद्धि हैं तुम्हारी! खेल तुम्हारे पकड़ से बाहर हैं! सिर्फ अपनी थोड़ी सी बुद्धि का प्रयोग करने से सब असलियत समझ मे आ जाएगीं! नाम; समस्याएं और समाधान बताने वाले सिद्ध बाबाओं से कभी पूछना तुम्हारे अपने पॉकेट मे कितना पैसा हैं? जो सिद्ध हैं नाम बता सकता हैं वो ये भी बता सकता हैं!°°°

*༺☀️ॐ✴️~नमो_परमात्मनें~✴️ॐ☀️༻*
°°°•••✳️॥>!धन्यवाद!<॥✳️•••°°°

838/☑️#बच नहीं पाओंगें‼️(कविता)

*चाहें मन्दिर मे मूर्तियों की पूजा करों या
*मस्जिदों मे अल्लाह की इबादत!
*या दिन-रात घंटी बजाओं,
*सुनने वाला सिर्फ एक हैं-
*और हर जगह है!
*वो खामोशी से बैठा हुआ मस्तक के
*एक कोने मे?
*कभी सोता नहीं! बिना पलक झपकाए
*तुम्हारें कारनामें को बड़े शान्ति से
*देखता और सुनता हैं!
*तुम उसे नहीं देख पातें!
*क्योंकि?
*लालच हैं; अहंकार की चर्बी हैं; राजनीति का तड़का हैं
*मलाई की चाह हैं; बुद्धि कुंठित हैं
*आँखों पर मैं, तूं ! हिन्दुत्व और नफरत का चश्मा हैं
*पाखण्डीयों, वेद, पुराण, कुरान आदि का दिव्य ज्ञान हैं!
*माला चाहें पचास करोड़ जपों
*या बहरा जान कर चौबीसों घड़ी अज़ान दो
*कोई फायदा नहीं यदि चाहत अपार हैं
*सच्चे नहीं हो, जप; इबादत का अहंकार और प्रदर्शन हैं
*तो मलाई वाली भोग से ही काम चलाना होगा,
*ईश्वर अल्लाह तो बहुत दूर की बात हैं !!
*काम धंधा भूलकर बस
*लड़ते रहो तेरा-मेरा करते रहों !!!
*रोटी के लिए झगड़ते दो बिल्ली और बन्दर
-की कहानी सुनी होगी?
*बन्दर काम कर जायेगा तुम लड़तें रहना
*बाबा दफन थे! बाबा सैकड़ों साल से कैद थे
-अब हमने ढूढ़ निकाला
*नन्दी जी की आंखें सूज गई
*वर्षो से इंतजार मे आदि आदि..
*तुम ही थे जो सैकड़ों शिवलिंगों को अभी हाल
-मे काशी मे तोड़ा
*तुम वही हो सनातनी हिन्दू?
*जो गंगा मे पाप धोते; कुल्ला करते हो, कचड़ा फेंकते
*तुम वही हो जो मूर्तियों, तस्वीरों और शिवलिंगों को पीपल -के पेड़ के नीचे लावारिस छोड़ आते हो?
*माता-पिता को वृद्धाश्रमों मे बिठा देते हो
*तुम वही हो जो गंगा से गंदा नाला जोड़ते हो
*तुम वही जो खाल का जूता पहनते हो
*तुम वही हो जो गांय का व्यापार करते हो
*तुम वही हो काम निकलते ही उसे मरने के
-लिए रस्ते पर छोड़ देते हो,
*तुम वही हो जो अलग बर्तन मे मांस खाते हो
*तुम वही हो जो दारू पी कर गालियां देते हो
*तुम वही हो जो माँ के पैर गिरते हो तो कैमरा
-मीडिया साथ होता हैं,
*तुम वही हो जो हज़ारों अनैतिक कार्य करते हो
*क्या कहू तुम और क्या क्या हो
*तुम इतने बड़े हो गए कि आज विश्व नियंता भी
*तुम्हारे रहमोकरम पर जीवित हैं
*तुममे तो आविष्कार कर लिया राम गायब हो गए थे
*तुम ढूढ़ लाए! बड़े बहादुर हो जो
*तुमने बन्धक हुए महाकाल को तालाबों से ढूढ़ निकाला
*और भी ढूंढो नदी; नालों: कब्रों: इमारतों
-इतिहास के पन्नों मे!
*बनाओ भारत को पाखण्ड का विश्व गुरू ?
*तीसरी डोज का नशा हैं जल्दी उतरेगा मुर्ख
*उन्हें मुक्त कराने चले हो
*जिनकी मर्जी से तुम्हारी सांसे चलती हैं!
*सुधर जाओं! मत छेड़ों शिव को!
*जैसे हैं उन्हें रहने दो वो उसी मे प्रसन्न हैं
*अन्यथा तुम कल्पना नहीं कर सकते
*जग गये तो काम की तरह राख के ढ़ेर ही
*नज़र आओगें चाहें जिधर भी भागो बच नहीं पाओगें !!!

*༺⚜️꧁✴️!! महामाया हरे-हरे !!✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>!धन्यवाद!<॥✳️•••°°°

837/☑️#विकल्प‼️

🥀दुनियां फेजवार उस मुकाम तक शीघ्र पहुंचने वाली हैं!
🥀जहां?
🥀शान्ति का मात्र
🥀एक ही विकल्प शेष हैं?
🥀दुनियां मे दो खेमें!
🥀और !!! आगाज?

➖🎯🔱!! विश्व-महा-युद्ध !!🔱🎯➖
🥀की..

🔴#कोई भी देश अनछुआ नहीं बचेगा! हर जगह तांडव दिखेगा! पृथ्वी का कर्ज सभी को चुकाना होगा!

🔴#समय! दुश्मन और सरहदों के विस्तार की सीमा स्वं तय करों! किसका परमाणु फटेगा; किसका बेकार होगा?

🔴#ये_सबके सिर और सरहदों के चारों तरफ घूम रहा अदृश्य त्रिशूल तय करेगा! जो कुछ करना हैं अभी मौका हैं! कुछ कट्टरपंथी सत्तानशी धार्मिक प्रमुख संगठन बहुत दूर तक की सोच रखते हैं! उसने से एक भारत भी हैं! यदि सांसे बनी रहीं तो अवश्य विचार करना! पहले सामने जो हैं उससे निपट लों!

🥀जितने दिन टाल सकते हो टाल लो,
🥀रोक सकते हो तो रोक लो;
🥀किन्तु युद्ध का अन्त और शान्ति का आखिरी एकमात्र मार्ग रास्ता यही बचता हैं!

🔴#यूक्रेन की पीड़ा दुनियां के सभी विस्तारवादी तानाशाहों, मौकापरस्तों को व्याज सहित भुगतना होगा! सभी पूरी तरह से बर्बाद होंगें!

🔴#ऐसी हालात मे यूक्रेन के समर्थित सभी देशों को जी- जान से लालच एवं निजी लाभ से अलग हटकर पूरी दृढ़ता से विस्थापित मेहमानों की मदद करनी चाहिए! उन्हें खाली पड़े मकान, काम और खाद्य सामाग्री मुहैया करानी चाहिए!

🔴#आज अपना बचाव करता यूक्रेन कल तानाशाहों के घर मे घुसकर भीषण पलटवार करेगा! तानाशाह पर भारी पड़ेगा! चुनती देगा और उसे लक्षमण रेखा के उल्लंघन के लिए बाध्य कर देगा! अंजाम से बेखौफ पश्चिमी संगठन उसके इच्छानुसार वो सभी आक्रामक हथियार देने को बाध्य होंगें जिससे वो अपने नुकसान की भरपाई कर पायेगा!

🔴#मृत्यु सन्निकट हैं! बस तय करना हैं मृत्यु को सीधे आमंत्रित करते हैं या थोड़ा-थोड़ा करके दर्द के साथ सिसक सिसक कर जैसी मर्जी!

🔴#अत्याचार; अतिक्रमण; दोहन; हथियार; प्राकृतिक संसाधनों का फायदे के लिए व्यवसाय करेंगे तो उसकी पूरी कीमत दुनियां को चुकानी होगीं !!!

🔴#तानाशाहों के एक पैर कब्र मे दूसरा सत्ता मे! हटते ही ये खुद मृत्यु का चयन कर लेंगे! सभी अपनी मानसिक एवं शारीरिक स्थिति को बखूबी जानते हैं!

🔴#दोषी दुनियां के तानाशाह ही नहीं अपितु महात्वाकांक्षी मजहबी, कट्टरपंथी भी हैं! इसके मूल मे जाये तो दुनियां को मुट्ठी मे करने की मौकापरस्त इन्सानों की अपनी चाहत, विलासिता, और सभी मजहब के धार्मिक पाखण्डीयों का मलाई वाला ज्ञान हैं! दुनियां का पूंजीवाद इसकी मजबूत बुनियाद हैं जो अंततोगत्वा धराशाई होकर रहेगा!

#किसी को कमजोर समझनें की भूल दुनियां को नहीं करनी चाहिए और ना ही किसी की कमजोरी का फायदा! सभी कमजोरों के साथ ईश्वरीय अदृश्य त्रिशूल हैं! वो पहले वाला समय गया! दुनियां के हर व्यक्ति पर उसकी नजर हैं!°°°

*༺⚜️꧁✴️‼️#शिवशरणम#‼️✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>!धन्यवाद!<॥✳️•••°°°

836/☑️#अन्धविश्वास ब..पाखण्ड-3‼️

🔴#आध्यात्मिक_मार्ग_पर_चलने से सबसे पहले सद-शास्त्रों का मिलावटी कथा, ज्ञान, मन की बात जान लेना, रोग हरण, झाड़-फूक या करतब आदि के रूप कुछ तुच्छ सिद्धियां हाथ आती हैं! भगवत नाम सहित, सुन्दर चेहरा, भगवा, चंदन-टीका, व्यासपीठ पर सामूहिक रामायण, भागवत की कथा; संगीत, लुक्स एवं साजो सामान या कुछ विशेष क्रिया; थोड़ी सुक्ष्म हाथ की सफाई के साथ जन प्रदर्शन करने से प्रसिद्धि आनी शुरू होती हैं! प्रसिद्धि से फॉलोवर्स फिर धन और धन से विलासिता या ऐयाशी इत्यादि! इसी को रिद्धि-सिद्धि-प्रसिद्धि कहते हैं! निन्यानवे प्रतिशत आध्यात्मिक पंडे, पुजारी, कथावाचक, सन्त, बाबा और अनेकों सम्प्रदाय से जुड़े साधू एवं अन्य मजहबी धार्मिक पाखण्डी लोग, सेवा संस्थान इसी के पीछे दीवाने हैं! किन्तु इसका अन्त बर्बादी ही हैं! सिर्फ इस लोक मे नही बल्कि परलोक मे भी महान कष्ट भोगना पड़ता हैं!

🔴#मन्दिर_शिवलिंग_साधना_गुरू या पाखण्ड, प्रपंच से_जुड़े रहने का मतलब यह नहीं कि सीधे शिवलोक प्राप्त हो जायेगा मूर्खों! उसके लिए तुम्हें शिव के वास्तविक रूप को आत्मसात करना होगा! मलाई के रहते यह नामुमकिन हैं! सलाखों के पीछे या कुछ देश छोड़कर भाग गए कई सन्त बाबा इसके उदारहण हैं! कभी उनकी भी तूती बोलती थी! लाखों की भीड़ इकट्ठी होती थी! जैकारें लगते थे! राजनीति उनके चरण वंदन करती थी! लोगों ने साक्षात भगवत रूप मान उनकी पूजा आराधना करनी शुरू कर दी थी! उनकी अपनी रामायण पढ़ी जाने लगी! धीरे-धीरे उन्होंने अपने लालची समर्थकों के साथ लोगों मे आत्मज्ञान बांटना शुरू कर दिया! तंत्र का भी ईस्तेमाल करना शरू किया! प्रचार के माध्यम से उन्होंने अपने सभाओं की बोली लगानी शुरू कर दी! बड़े बड़े पंडाल और मंचों का निर्माण मीडिया सहित करना शुरू कर दिया! अन्य भी बहुतेरे धंधे शुरू कर दिये! इस तरह से उन्होंने धर्म और आध्यात्म को बाजारू एवं व्यवसायिक बना दिया! ठेकेदार बन गए!

#सरल_सहज_वैरागी_ निरीह_ईश्वर को यह नाटक पसन्द नहीं! तुच्छ सिद्धि प्रसिद्धि आध्यात्मिक व्यक्ति को मार्ग से गुमराह या पथभ्रष्ट करने के लिए आती हैं! जिसका प्रदर्शन आध्यात्म मे पूर्ण रूप से वर्जित हैं! तंत्र कदापि बेचने की वस्तु नहीं हैं! कोई भी तांत्रिक क्रिया सिर्फ आत्म कल्याण के लिए ही होती हैं! ज़न प्रदर्शन के लिए नहीं! अपना कल्याण हुआ नहीं लोग दूसरों के कल्याण करने मे अपना उल्लू सीधा करने लगते हैं! सदैव सावधान रहें! सच्चे आध्यात्मिक मार्ग पर चलने वाले कितनी भी बड़ी-बड़ी सिद्धियां हो उनका त्याग विस्टा समझ करते हैं क्योंकि उनका लक्ष्य वो नहीं! इसी पर आधारित आज कल के पाखण्डी बाबाओं, तांत्रिकों, कलाकार योगी; सन्यासियों की कुछ कारनामें और भगवान के नाम पर अपने अनुयाइयों द्वारा चलाए जाने वाले गोरखधंधें जो आगे जानेंगे! बदलना होगा सबको त्रिशूल की नजर ऐसे सभी बाबाओं पर हैं!°°°क्रमशः

*༺☀️ॐ✴️~नमो_परमात्मनें~✴️ॐ☀️༻*
°°°•••✳️॥>!धन्यवाद!<॥✳️•••°°°