835/☑️#अन्धविश्वास ब..पाखण्ड-2‼️

🔴#ये_वही_कट्टर_धार्मिक_पाखण्डी संगठन के लोग हैं जो कभी अपने जीते जी अपने माता-पिता, बुजुर्गों को पूछते नहीं! उनकी सेवा नहीं करते! किन्तु शिवलिंग और मंदिर को पकड़ कर चारों प्रहर दही; दूध; मेवा; भस्म से नहलातें हैं! क्यों! क्योंकि उन्हें मलाई से प्रेम हैं शिव से नहीं! इनके अपने घर के चूल्हे बंटे हुए हैं! अखंडता की बात करते हैं! स्वर्गवासी या जीवित बुजुर्गो का नाम तक याद नहीं रखते लेकिन धर्म, राजनीति, मस्जिद-मन्दिर, नफरत के नाम पर कुछ इतिहास हो चुके मुस्लिम आक्रांताओं का नाम और उनके कारनामें पुराने पन्नों और कब्रों से ढूढ़ निकालतें हैं! जिन्दों से इन्हें प्रेम नहीं! मुर्दे-मूर्तियों के अवशेषों को ढूढ़ने मे अपनी पूरा सरकारी तंत्र और बुद्धि का ईस्तेमाल करते हैं!

🔴#खास_बात_यह_कि_इन्होंने_न्यायपालिका को भी धर्म का अखाड़ा बना दिया हैं! उसे अपने हित मे भरपूर ईस्तेमाल करते हैं! मजबूर, अन्धी और अब तो पक्षपाती बिकाऊ? न्यायपालिका भी क्या करें इन्हीं के रहमोकरम पर टिकी हैं! ये मौकापरस्त ऐसे ही पुरानी कब्रों को खोदकर उसकी आड़ मे धार्मिक मलाईदारों और पूंजीवादी ताक़तों का हित करते हैं! फिर वही ताकतें इनका पोषण करती हैं! किन्तु अब त्रिशूल की नजर हैं! कोई बचने वाला नहीं! समय आ रहा हैं! करनी का फल कहीं और नहीं यहीं भुगतना होगा!

#झूठ; शाम; दाम; दण्ड; भेद; प्रचार; नफरत; दोहन; ज्ञान; महंगाई; मन्दिर; बंटवारा; कब्जा; लूट; नारा; बीमारी; हिंसा और अन्त मे युद्ध मतलब पूरा सत्यानाश! ये सब पूंजीवादी पाखण्डी सरकार और उसके धार्मिक संगठनों के हथियार हैं! इन्हें ना राष्ट से प्रेम हैं ना ईश्वर से और ना ही हिन्दुत्व-हिन्दू सहित अपने हिन्दुत्ववादी समर्थकों से! प्रेम हैं तो सिर्फ पूंजी से पैसे से मलाई और ऐयाशीं से! ये सभी उन्हीं गुरुओं के प्रोडक्ट हैं जो बिना सोचे-समझे परखें कोरा ज्ञान देकर धड़ल्ले से अपने चेले मार्केट मे उतारते हैं! इसके लिए ये प्राचीन गुरू-शिष्य परम्परा की दुहाई देते हैं! ऐसे लोगों पर अपना आशीर्वाद और प्यार लुटाते हैं! सही कहां जाय तो इस सबके पीछे कुछ ऐसे ही अधूरे गुरू दोषी हैं! जो चंद पैसे के लिए अपने ज्ञान का सौदा कर लेते हैं! इनके लिए मठ-मलाई, सत्ता ही सर्वोपरि हैं! कपड़े अलबत्ता भगवा, सफेद पहनते हैं! कभी इनकी शाही सवारी और राजसी ठाठ देखिए! किस एंगल से ये साधु सन्त या योगी लगते हैं!°°°क्रमशः

*༺⚜️꧁✴️!! महामाया हरे-हरे !!✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>!धन्यवाद!<॥✳️•••°°°

834/☑️#अन्धविश्वास बनाम पाखण्ड‼️

🟣#पेज_हमेशा_जोर_देता_हैं कि आपके या पड़ोस मे घट रहीं घटनाओं से सीखें। घटनायें स्वं गुरू हैं! आज कहीं और घटीं! कल अपनों के साथ! परसों स्वं के साथ! सब खामोश हैं! नित नई-नई घटनायें घटती जाती हैं! कभी कश्मीर मे तो कभी कन्याकुमारी मे! धीरे-धीरे हम सभी मृत्यु के आगोश मे बढ़ते जा रहे हैं फिर भी कुत्सित बुद्धि व लालच से पार नहीं! आस्था ठीक हैं किन्तु अन्धविश्वास उचित नहीं! यदि धर्म का ऐसा नजरियां होगा तो वो दिन दूर नहीं जब चौराहों के गोल पोस्ट या हर गोल या अंडाकार वस्तु को भी शिव लिंग के रूप मे प्रचारित किया जायेगा! अंधविश्वासी, आस्तिक मान्यताओं के पुजारी धार्मिक कुछ सिरफिरे लोग सबसे पहले दूध, जल, दही, फूल और अगरबत्ती लेकर चढ़ाने पहुंच जाएंगे! मीडिया शोर मचाकर प्रमाणपत्र दे देगा और उसके पीछे भीड़ पागल होकर घर मे जो भी बचा खुचा हैं उसे वहां चढ़ा आयेगी! ऐसे ही मुर्तियां दूध पी रही हैं प्रचार किया जाता हैं! अन्धविश्वासी लोग दूध का डिब्बा लिए भीड़ के साथ पहुंच जाते हैं! मीडिया, पेपर मे सुर्खियों मे आ जाता हैं! दूर दूर से लोग दर्शन पूजन को पहुंच जाते हैं!

🟣#वर्तमान_परिप्रेक्ष्य_मे_देखें तो बूस्टर डोज के अलावा लम्बे समय से चल रहें कोंरोंना के कारण, बढ़ती अनिश्चितता, महंगाई, बेरोजगारी और भय के माहौल ने पूरे देश-दुनियां; समाज के साथ बड़े-बड़े राजनीतिज्ञों, और पूंजीपतियों मे भी सोचने की शक्ति को लगभग खत्म ही कर दिया हैं! आज देश-दुनियां मे जो हो रहा हैं उसी का परिणाम हैं! संकीर्ण एवं कुंठित मानसिकता! दिन रात मीडिया, पूंजीवाद, तंत्र और सरकार इसी काम मे लगें हैं! समझाना इस पेज का कार्य हैं! समझना या ना समझना ये आपकी मर्जी हैं! ईश्वर ना करें पड़ोसी देशों की तरह वो स्थिति यहां भी आए और भारत को भी उसी तरह गंभीर परिणाम से गुजरना पड़ें! जनता सब गवां कर सड़कों पर भूखी-नंगी दौड़ लगाये! कहते हैं! मरता क्या नहीं करता! जब अपने पर आ जाती हैं तो इन्सान हर वो कार्य कर गुजरता हैं जो नहीं करना चाहिए! सड़कों पर उतरना कोई नहीं चाहता किन्तु मजबूरी और हालत किसी के बस मे नहीं! नफरत और इतिहास की राजनीति ने देश मे मूलभूत इन्सानी जरूरतों से हटकर एक अलग घृणा का माहौल ही देश-दुनियां मे कायम कर दिया हैं!

#घर_महल_तो_उनके_भी_जलेंगे किन्तु उसके पहले नंबर देशवासियों आपका का ही होगा! वो तो आपदा और विपत्ति मे आपको मझधार मे छोड़ सब बेच-बाचकर; झोला सहित हेलिकाप्टर, हवाई जहाज से पलायन कर जाएंगे किन्तु आप कहां जाओगें! जबतक गाड़ी चल रहीं हैं आप पर कोई फर्क़ नहीं पड़ेगा किन्तु एक ना एक दिन सभी को जब होश आयेगा तबतक सब लुट चुका होगा! आपकी नजर मे वो शक्ति नहीं जो पर्दे के पीछे का खेल देख सकें! ताली बजाने वाले ही सड़कों पर पहले उतरेंगे! आज जो साधु-समाज इस खेल मे अपना हित देख रहा हैं; संयम से अपना मौन समर्थन दे रहा हैं! सनातन एवं हिन्दुत्व के झंडे के नीचे मलाई के साथ बैठा हैं! कल वो भी सड़कों पर होगा! ज्ञान देना और ज्ञान पर चलना दोनों मे महान अन्तर हैं! यही वज़ह हैं कि धार्मिक मतभेद दुनियां मे अपने चरम पर हैं! झूठ फरेब की अन्धी दुनियां मे सच्चाई को कोहिनूर की तरह ढूंढना पड़ता हैं!°°°

*༺✳️ॐ✴️~नमो आदिशंकरमहादेव~✴️ॐ✳️༻*
°°°•••✳️॥>!धन्यवाद!<॥✳️•••°°°

833/☑️#ज्यादा_इतराना ठीक नहीं‼️

🔴#इतिहास_को_छेड़ोंगें? तो जो थोड़ा-बहुत वर्तमान शेष हैं वो भी इतिहास होते देर नहीं लगेगा! कौन हैं ये लोग! जिनका मकसद सिर्फ धर्म के नाम पर नफरत फैलाना हैं! उस समय क्यों नहीं लड़े जब मूर्तियां विदेशी आक्रान्ताओं द्वारा तोड़ी जा रहीं थीं! तब क्या हाथों मे दही जमी थी! तुम्हारे मलाईदार; तलवे चाटने वाले पूर्वज राम और महादेव के नाम का जप और गुहार मन्दिरों और मूर्तियों की रक्षा के लिए कर रहे थे! संख्या मे ज्यादा होते हुए भी उन्होंने मंदिर-मूर्तियों की रक्षा नहीं की! अंधविश्वास का चश्मा पहन रखा था! जो आज भी वैसे ही हैं! क्या भगवान ने तुम्हारे हाथ पकड़ रखें थे! तब पुरुषार्थ नहीं जगा! आज क्या तुम्हें महादेव या राम-जी से वरदान प्राप्त हो गया या अचानक सोई हुई चेतना जागृत हो गई! या सरकार और तंत्र की पूरी मौन सहमति प्राप्त हो गई! या फिर अचानक आत्मज्ञान हो गया जो हर पुरातन इमारत, दूसरे धार्मिक स्थल या मस्जिद के नीचे तुम्हें शिवलिंग और देवी देवताओं के चित्र के साक्षात दर्शन होने लग रहे हैं!

#शिवलिंग_और_शिव को अपनी ओछी हरकत से दूर रखों नहीं तो सोते-जागते, दिन-रात त्रिशूल के ही दर्शन होंगे! पता भी नहीं चलेगा कब क्या और कैसे अर्थ का अनर्थ हो जायें! चार दिन की सरकार के बल पर इतना इतराना ठीक नहीं! ईश्वरीय शक्ति के लिए इस पृथ्वी पर कोई कितनी भी ताक़तवर सत्ता बस उसके पलक झपकनें या तुम्हें चंद सांसो को मुहैया कराने से ज्यादा अहमियत नहीं रखता!°°°

*༺✴️꧁‼️#सत्य_ही_शिव_हैं‼️꧂✴️༻*
°°°•••✳️॥>!धन्यवाद!<॥✳️•••°°°

832/☑️#प्रेम_किससें‼️

🔴#मूर्खों! साक्षात “शिव” लिंग तो तुम्हारे अपने माता-पिता हैं कभी उनकी भी सेवा-पूजा कर लिया करों! क्या तुमनें ये नहीं सुना-पढ़ा श्रीगणेशजी ने अपने माता-पिता की परिक्रमा करके तीनों लोकों को कुछ ही पल मे नाप लिया था और अपनी प्रखर बुद्धि, चतुराई, निष्ठा और मात्रपितृ भक्ति से देवताओं मे परमपूज्य माने गएं! और कितने शिवलिंग; मन्दिर चाहिए! संसार का हर कण; हर पत्थर शिव लिंग ही तो हैं! क्या समझते हो जहां तुम भीड़ लगाकर दूध-मलाई का व्यापार करते हो वहां ईश्वर बैठा हैं? सच ये हैं कि तुम्हें ईश्वर से कोई प्रेम नहीं! तुम्हें खुद से भी प्रेम नहीं! तुम्हें लोगों से भी प्रेम नहीं! तुम्हें अपनी पत्नी, बच्चों माता- पिता, सुहृद से प्रेम नहीं! तुम्हें किसी से भी प्रेम नहीं! तुम्हें प्रेम हैं सिर्फ मलाई से! तुम्हें प्रेम हैं सत्ता से! तुम्हें प्रेम हैं नफरत से! तुम्हें प्रेम हैं इतिहास से! तुम्हें प्रेम हैं हिंसा और अपने वर्चस्व से! सुधरना होगा सबको! त्रिशूल की पूरी नजर हर एक मजहबी मौकापरस्त और ऐसे कट्टरपंथी धार्मिक जाहिलों पर हैं!°°°

*༺☀️ॐ✴️~नमो_परमात्मनें~✴️ॐ☀️༻*
°°°•••✳️॥>!धन्यवाद!<॥✳️•••°°°

831/☑️#मूल_की पहंचान‼️

🔴#ईश्वर_की_असीम_कृपा_एवं_माता-पिता के संयोग से माँ के गर्भ मे आरोपित एक अदृश्य बीज जिससे हम सबकी उत्पत्ति होती हैं! जिसे प्रकृति रूप माता-पिता ने पंच-भूतो की सहायता से पाल पोश कर बड़ा किया यही असलियत हैं! हम सभी भाग्यशाली हैं जो हमें पृथ्वी पर आने का मौका माता-पिता, संसार और ईश्वर ने प्रदान किया अन्यथा हमारे जैसे करोड़ों ऐसे बीज भी होंगे जो गर्भ मे ही नष्ट हो गये होंगे जिनकी अपनी बारी ही नहीं आती! बलशाली शरीर के साथ जुड़ी सांसारिक सुख, सम्पति, ऐश्वर्य एवं समृद्धता आदि तो मात्र हमारी कल्पना हैं जो एक दिन पुनः खाक और राख हो जायेगी किन्तु बीज कर्मानुसार फिर से गर्भ के इंजतार मे सदियों तक भटकता रहेगा! मानव जीवन का यही उद्देश्य हैं जीते जी इसी जीवन मे अपने मूल की पहचान कर लें! जिससे मृत्यु मार ना सके और उससे पार जा सकें! इसके लिए सार्थक प्रयास अभी से करने होंगे! हर चीज़ गुरू से नहीं सीखीं जाती कुछ स्वतः भी प्रयत्न करने होंगे! ध्यान रखें! आध्यात्म फल प्राप्ति का मार्ग नहीं हैं और ना ही गुरू की रोज-रोज हाजिरी; चरण चंपी और मंदिरों के चक्कर लगाने का! गुरू भगवान नहीं हैं! गुरू सिर्फ एक मार्गदर्शक हैं! सम्मान सबका हैं! किन्तु चाटुकारी किसी की नहीं! धोखे से बचें! आध्यात्म निहायत ही सहज और सरल हैं! अपनी बुद्धि का प्रयोग करें! ईश्वर को साक्षी मान यात्रा शुरू करें! वो सब देखता और सुनता हैं! मन मे विश्वाश रखें जब भी किसी तरह की आध्यात्मिक मदद की आवश्यकता होगी वो किसी ना किसी तरीके से अवश्य निराकरण देगा! निःस्वार्थ भाव से भगवत नाम, गोपनीयता, सत्य, सहजता एवं जो कुछ अच्छा करते हैं उसके फल का त्याग या अर्पण ही वो सीढ़ी हैं जिसको जीवन मे अपनाने से इसी जन्म मे बड़े आराम से यात्रा कर सकते हैं! किसी बिचौलिए की जरूरत नहीं! ईश्वर से संबाद सीधा स्थापित करें! नहीं तो वही अटके रहेंगे सिर्फ किताबी ज्ञान होगा और वो वर्तमान मे पूरे बाजर मे ओवरफ्लो कर रहा हैं फिर भी दुःखों से निजात नहीं!°°°

*༺☀️ॐ✴️~नमो_परमात्मनें~✴️ॐ☀️༻*
°°°•••✳️॥>!धन्यवाद!<॥✳️•••°°°

एक कदम आध्यात्म की ओर..