885/☑️#वक्त_का पहियां‼️

वक्त का पहिया हैं जनाब?
थामने से नहीं थमेगा! एक समय
के पश्चात सबको पहिये के नीचे ही
आना हैं! कोई अपने को मुकद्दर का
सिकंदर; महाबली कर्ण या अर्जुन ना
समझे! काल के गर्त में हर इंच
ना जाने कितने सिकंदर; कर्ण; अर्जुन;
शकुनी दफ्न हो गयें! आज उनका
नाम भी किसी को याद नहीं !!!°°°

यदि हर इन्सान ये सोचें कि
मेरे सामने वाला; अजनबी
या पड़ोसी कैसे सुखी हो तो
रामराज्य का सपना वर्तमान
मे ही साकार हो सकता हैं !!!°°°

जिन कारणों नें किसी आम व्यक्ति
को शीर्ष तक पहुंचाकर खास बनाया
उसी का कर्ज उतारनें या संतुष्ट करने में
वो अपना बहुमूल्य समय गवां देता हैं!
अन्त में अपने उन तमाम कारणों के
साथ पतन को प्राप्त होता हैं? इसलिए
कारणों का तुष्टीकरण ना करके मनुष्य
को अपने कर्तब्यों का पूरे मनोयोग से
पालन करना चाहिए? यहीं
उसका धर्म हैं !!!°°°

डरपोक?
मौकापरस्त?
साजिशों को अंजाम
देते हैं! तंत्र को आगे करते हैं!
वहीं बीर? सामना करतें हैं !!!°°°

*༺⚜️꧁✴️‼️ॐ#शिव#ॐ‼️✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°°

884/☑️#काल_की गति‼️

काल की गति कोई नहीं जान सकता प्यारे?
काल की गति मनुष्य हो या देव सब पर भारी हैं!
उसका कोई तोड़ नहीं! कोई सानी नहीं?
देश और दुनियां को कहां ले के जा रहा!
किससे क्या करवा रहा
ये तो वो ही जानें!
काल सबसे पहले बुद्धि
पर वार करता हैं! उसे भ्रमित कर देता हैं!
बलात ज्ञानी हो या अज्ञानी? वो कृत्य करने को मजबूर
कर देता हैं जो नहीं करना चाहिए!
अनुकूल प्रकृति वाले को अपना निमित बना
कारण पैदा कर नित नई घटनाओं को जन्म देता हैं
और अहम से अहम को लड़ाकर अपना ग्रास बना लेता हैं। नियति को यही खेल पसन्द हैं!
जिस त्रिशूल की बात ये पेज करता हैं
वो अदृश्य काल ही हैं!
शायद इसीलिए देश व दुनियां पर
तमाम चेतावनियों का कोई असर नहीं !
इसमें किसी का कोई दोष नहीं?
सभी काल की चाल से मजबूर हैं!
कल जो सिकंदर थे आज कहां हैं?
आज जिन्हें लगता हैं वो मुकद्दर के सिकंदर हैं
कल उनके मुकद्दर भी काल के निवाले होंगे!
होने दो जो हो रहा हैं! वक्त का पहिया हैं
थामने से नहीं थमेगा! एक समय के पश्चात
सबको पहिये के नीचे ही आना हैं
वैसा ही इतिहास होने के लिए
जिसकी वो पूरी
सिद्दत से चर्चा करते हैं !!!°°°

अच्छे व धैर्यवान लोगों पर शिव की दृष्टि
देर से पहुंचती हैं क्योंकि उन्हें पता हैं इनमें
सहनशक्ति हैं; सह लेगा! कहीं और नहीं
भागेगा? इस मध्य ईश्वर कईयों बेसब्र
झूठों का हिसाब-किताब बराबर कर
रहें होते हैं! कहते हैं न उनके
दरबार में देर हैं; किन्तु
अंधेर नहीं !!!°°°

*༺⚜️꧁✴️‼️ॐ#शिव#ॐ‼️✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°°

883/☑️#प्रेम_बनाम पूर्णता‼️

🔴#प्रेम_तभी_तक रहता हैं जबतक अभीष्ट की प्राप्ति नहीं होती! अभीष्ट प्राप्त होते ही प्रेम का अभिष्ट मे विलय हो जाता हैं!अर्थात प्राप्ति से प्रेम पूर्ण हो जाता हैं! इसलिए एक प्रेमी को कभी भी विलय या अभीष्ट की प्राप्ति; या अपने साध्य से एक कदम पीछे ही रहना चाहिए जिससे प्रेम सदा निर्विकार बना रहे! विलय हो जाने पर प्रेम की कोई महिमा नहीं रहती! इसलिए शरीर के रहते पूर्णता को नजरअंदाज करना ही हितकर हैं जिससे अभिष्ट या प्रेम से एक प्रेमी का सतत तारतम्य व दिव्य आकर्षण सदैव बना रहें! प्रेम चाहें ईश्वर से हो या किसी इन्सान से! प्रेमी या प्रियतम से वियोग? विरह की अग्नि ही प्रेम का हेतु कहा गया हैं! इसका अपना ही आनंद हैं! मीरा ने कृष्ण से ऐसा ही प्रेम किया था जो अपने मे अलौकिक था! प्रेम जब पूर्ण हुआ तो मीरा मीरा ना रहीं !!°°°

धर्म जब पाखण्ड तक सीमित हो जाए?
धर्म का उद्देश्य जब सिर्फ पैसा; पद; यश हो?
धर्म जब राजनीति का चादर ओढ़ ले?
अधर्म जब धर्म बन जाये?
अधर्म जब साधू के भेष में सीता का
अपरहण करें? धर्म जब पूर्णतया
कलंकित हो जाये? फिर ऐसे समाज
की रक्षा ईश्वर भी नहीं करतें !!!°°°

*༺⚜️꧁✴️‼️ॐ#शिव#ॐ‼️✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°°

882/☑️#द्वादश_ज्योतिर्लिंग स्तुति‼️

🔴#भगवान_शिव_के बारह ज्योतिर्लिंगों का पाठ सुबह-शाम करने से सभी ज्योतिर्लिंग के दर्शन का फल के अलावा सात जन्मों तक का पाप नष्ट हो जाता हैं! साथ में शिव जी सुन्दर बुद्धि भी प्रदान करते हैं !!°°°

🥀सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्‌।
🥀उज्जयिन्यां महाकालमोंकारं ममलेश्वरम्‌॥1॥

🥀परल्यां वैजनाथं च डाकियन्यां भीमशंकरम्‌।
🥀सेतुबन्धे   तु  रामेशं  नागेशं  दारुकावने॥2॥

🥀वारणस्यां  तु  विश्वेशं  त्र्यम्बकं  गौतमी  तटे।
🥀हिमालये तु केदारं  ध्रुष्णेशं च शिवालये॥3॥

🥀एतानि  ज्योतिर्लिंगानि  सायं प्रातः पठेन्नरः।
🥀सप्तजन्मकृतं   पापं  स्मरेण  विनश्यति॥4॥

॥ इति द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तुति संपूर्णम्‌ ॥

•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••

881/☑️#कोई_सुरक्षित नहीं‼️

🔴#तमाम_राज्यों_के_क्षेत्रीय विपक्षी दलों का अपना-अपना अहम हैं! जब तक यह अहं नहीं टूटेंगा तब तक एक मजबूत एकजुट मुख्य विपक्ष उभरकर सामने नहीं आयेगा! सभी क्षेत्रीय दल! देश या राज्यों के प्रधान या मुखियां बनने का सपना देख रहे हैं! क्या कोई भी विपक्ष सुरक्षित हैं? कुछ तो जांच ना हो; उसके भय से; मलाई दूने रफ्तार से बढ़ती रहे सत्ता का शागिर्द होना या बागी होना स्वीकर कर लियें! कुछ अभी अड़े हुए हैं! वही पुरानी राजनीति तुष्टीकरण भाई भतीजावाद! उससे बाहर ही नहीं निकालना चाहते! उन्हें बनी-बनाई थाली ही खाना हैं! उनकों कौन समझाये! वक्त ही ऐसे लोगों को समझा सकता हैं! सत्ता का नशा; चाह व मलाई मे बड़ा ताकत हैं जब तक पूरी तरह से उतरता नहीं! बुद्धि ईश्वर भी नहीं खोल सकते! इतने डंडे खाकर तो एक दुर्दांत अपराधी सुधर जाता हैं! किन्तु एक सत्ताधारी या विपक्षी नेता नहीं! सुधार जाये वो नेता भी कैसा! ठीक हैं पहले सभी आपस मे लड़-भीड़ लो फिर जो बचेंगे उन्हें युवा क्रांतिवीर जनता और किसान डंडे मार-मार कर सुधार ही देगें! सुधरना तो सबको होगा! त्रिशूल किसी को चैन नहीं लेने देगा फिर वो चाहें सत्ता हो या विपक्ष या कोई और! सबके गर्दन पर घूम रहा हैं! सबको नाच मचाकर; पानी पिला-पिला मुंडन संस्कार करेगा !!!°°°

प्रदेशों में जितने आईएएस; आईपीएस व
अधिकारी हैं उन्हें ऑफिस मे नहीं अपितु
सड़क पर कुर्सी लगाकर जनता के
समस्याओं का निपटारा करना
चाहिये! जन सेवकों को ऑफिस
मे वर्किंग-आवर के बाद बैठना
चाहिए! नेताओं की चौकीदारी
करना छोड़ दो! जनता के प्रति
तुम्हारी जवाबदेही हैं! यदि ऐसा
नहीं हैं तो कुर्सी छोड़ दो घर बैठों !!!°°°

मेरे बहुत से रूप हैं?
मेरे मित्र किस चश्में से
देखते हैं ये उनपर
निर्भर करता हैं! उनका
अपना व्यक्तिगत भाव हैं!
कोई पक्षपाती समझता हैं तो
कोई पागल! कोई आदर भी
देता हैं तो कोई नफरत या
गाली भी! मुझे सब प्रिय
हैं; सबका समान आदर हैं !!!°°°

कुछ मित्रों को उत्तर देने मे बहुत जल्दी होती हैं?
बिना समझें अटैक के मूड में आ जाते हैं!
ठीक से ना ही पढ़तें हैं; ना ही समझतें हैं
ना सोचते हैं; ना ही किसी की सुनते हैं!
हर जगह बस टांग अड़ातें हैं!
तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं! कुछ भी बोल देते हैं!
इतनी भी जल्दीबाजी क्या हैं दोस्त?
देश खड़ा हो गया हैं? 
किस-किस से लड़ोगे!
किस-किस का मुहं बन्द करोगें!
करों? किसने मना किया है! अपना
फायदा ना दिखें तो शिव; राम; कृष्ण को
भी दलाल साबित कर दोगें! इसी को कहते हैं
गरूर! अंधविश्वास! अर्धज्ञान! अंधभक्ति!
ईश्वर की नहीं! पाखण्ड की भक्ति !!!°°°

फिजा में खामोशी
आने वाले तूफान का
संकेत हैं !!!°°°

वर्तमान परिपेक्ष्य में किसी शायर
की दो लाइनें?—
मुद्दई लाख बुरा चाहें तो क्या होता हैं।
वही  होता हैं जो मंजूरें खुदा होता हैं॥

बिना मलाई त्याग के देशभक्ति नहीं हो सकती?
सत्ता को शुरूवात प्रथम स्वं से करनी होगी!
कथावाचकों की तरह दूसरों से धन का त्याग कराकर
खुद चासनी मे डूबे रहना यह किस गीता में लिखा हैं!
नेताओं को भी त्याग करना होगा!आखिर कैसे
भारत का निर्माण कर रहें हैं!
देश को क्या संदेश देनें की कोशिश हैं!
नव भारत का निर्माण करना हैं तो
शुरूवात स्वं से करों! ये भ्रम मत पालो कि
ईश्वर दिखाई नहीं देता तो अंधा हैं; देखता नहीं !!!°°°

*༺⚜️꧁✴️‼️ॐ#शिव#ॐ‼️✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°°

एक कदम आध्यात्म की ओर..