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1927/☑️#सम्भालों_खुद_को‼️

🎯#जैसे_धार्मिक_उन्मादीयों_के लिए उन्माद ही उनका धर्म हैं! ठीक उसी तरह उदारवादियों के लिए उदारता ही उनका धर्म हैं! सत्य और असत्य भी अपने-अपने प्रकृति के अनुसार अपने धर्म और पक्ष का पालन करने के लिए मजबूर हैं! जो जहां हैं वहीं ठीक हैं! पाला बदलने की आवश्यकता नहीं! समाज के सन्तुलन के लिए विपरित पक्ष की विशेष आवश्यकता हैं! यदि ऐसा नहीं होगा तो ना ही सृष्टि का संचालन होगा और ना ही आत्मिक उत्थान? अपने मन मुताबिक विषय चुन लो और लड़ों !!!°°°

🎯#सड़कों_पर_बैठकर_अपने_घर की बनी रूखी-सुखी रोटी बांटकर खाओं! लड़ाई लड़ने के लिए बड़े भव्य आयोजन या भंडारे की आवश्यकता नहीं! घर छोड़ गांव; शहर; सड़कों पर बैठों! अपने तरीके से संघर्ष व तप करों! पद-यात्राओं में भाग लो! किसानों और पीड़ितों की आवाज बनों! प्रश्न पूछो! आवाज दो हम एक हैं! कोई ताकत तुम्हें एक दूसरे से अलग नहीं कर सकती! त्रिशूल तुम्हारें साथ हैं! स्वार्थरहित एक दूसरे की मदद करों! जो पिछड़ रहा या गिर रहा उसे सहारा दो उसे साथ लेकर चलो! चार कदम ही सही किन्तु चलो उन पीड़ितों के साथ जिनसे तुम्हारा कोई लेन-देन का संबंध नहीं हैं! किन्तु तुम्हारें ही रूप हैं! लड़ों? पूँजीपतियों और बाबाओं से साठगांठ कर चल रही सरकारों के गलत नीतियों और नियमों के विरुद्ध! मलाई खाने-खिलाने को जो अपना धर्म समझते हैं उनके विरुद्ध! ऐ.सी कमरों में बैठकर जो तुम्हारे लिए नीतियां बनाते हैं उनके विरुद्ध! भेद के विरुद्ध! शोषण और दोहन के विरुद्ध! भय के कारोबार के विरुद्ध! नेताओं; मनचले धर्मज्ञों और पूंजीपतियों के बनाए असंख्य भ्रमित नियमों के विरुद्ध जो तुम्हें पीड़ा देते हैं! कष्ट में डालते हैं! तुम्हें भयभीत करते हैं! डरों नहीं लड़ों! मानवता के सफ़ेद दुश्मनों से जिन्होंने तुम्हारें लिए ही सभी नियमों और प्रपंच का आविष्कार किया! उन्हें खदेड़ो सत्ता से! व्यास से! गावों; शहरों और संसद से! राजनीति से! अपने मन से! संघर्ष करों! त्रिशूल जागृत हैं! तुम्हारें साथ हैं! तुम्हें सोना नहीं हैं! जज्बे के साथ प्रहार करना हैं! भारत तपस्वियों का देश हैं! मंदिरों में घंटी बजाकर लूटने वालों का नहीं! सत्ता की चासनी में डूबे मदमस्त अहंकारी विलासी नेताओँ और विलासी लोगों का नहीं! पूँजीपतियों का नहीं! भगवा पहनने से कोई तपस्वी नहीं हो जाता! साधारण कपड़ों मे तुम और पहले तुम्हारें पूर्वज तपस्वी ही थे! खुद को पहचानों? यही वर्तमान मे महामंत्र हैं!

🎯#आध्यात्मिक_या_लौकिक विशेष ज्ञान जिसे विज्ञान कहते हैं सहित अनुसंधान द्वारा प्राप्त की गई कोई भी सिद्धि या फिर उसके प्रदर्शन से प्राप्त प्रसिद्धि ईश्वर तुम्हें भेद रहित जनता की सेवा और समाज के हर एक नागरिक के उत्थान के लिए देता हैं! राजनीति और धंधे के लिए नहीं! अपने; अपने पुश्तों; रिश्तेदारों; पूंजीं या दुकानों के विस्तार के लिए नहीं! इस तथ्य को समझो !!!°°°

🎯#ईश्वर_यज्ञ_हवन_पूजा_पाठ, चन्दन, टीका, जनेऊ मंदिर में चढ़ावें; चौराहे पर भक्ति; नृत्य और रुद्राभिषेक आदि कर्मकांड से प्रसन्न नहीं होता बल्कि तुम्हारें अन्तर मन में सत्य कितना हैं; ईमान कितना हैं? दया कितना हैं? दूसरों के लिए दर्द कितना हैं; लालच कितना हैं? इच्छाएं कितनी हैं उससे ही प्रसन्न होता हैं! क्या खाते तो क्या पीते हो इससे उसका कोई प्रयोजन नहीं! मांस, मदिरा नशा तो व्यक्तिगत नुकसान पहुंचा सकता हैं किन्तु व्यक्ति विशेष द्वारा बोला गया या सामाजिक प्रयोग में लाया गया एक झूठ या किया गया कोई भी आपराधिक शोषण/मिलावट/चोरी/पूँजीवादी दोहन वाली नीतियां आदि जो कि अनैतिक और समाज को पीड़ित करने वाली हो हज़ारों लोगों का बसा-बसाया घर बर्बाद या फिर पीड़ित लोगों को आत्म हत्या करने पर मजबूर कर देता हैं! फिर कैसे कह सकते हो तुम हत्यारे नहीं हो? जनता का जमा किया गया मेहनत का पैसा लूट कर जो अरबपति पूँजीपतियों ने देश छोड़ दिया या आज जो धोखाधड़ी और सत्ता के साठगांठ से अपने विस्तार मे लगे हैं क्या वो सफेदपोश हत्यारे नहीं हैं! ऐसा कौन सा पाप वो नहीं करते? क्या ऐसे लोगों को पोषित करने वाली सत्ता खुद हत्यारी नहीं हैं! आखिर कब तुम अपने को समझोंगे! कब खुद को पहचानोंगे! बदलाव का समय हैं यदि नहीं खुद को बदलोगें तो अदृश्य त्रिशूल के महाविनाश की वीभत्स तबाही से दुनियां कोई शक्ति खुद को ज्यादा देर तक नहीं रोक सकती !!!°°°

*༺⚜️꧁✴️‼️ॐ#शिव#ॐ‼️✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°°

1026/☑️#देर_सबेर_वहीं पहुंचना हैं‼️

🔴#महंगे_ऑफिसों_के_बंद कमरों में पूंजीपतियों की बड़ी-बड़ीं नीतियां बनाने वाले सिपहसालारों की नौकरियां पहले जाएंगी! फिर..? आगे खुद अपनी बुद्धि का प्रयोग करों! खुद ही विश्लेषण कर लो! नए स्टार्टअप डूब जाएंगे! भय का व्यापार करने वाले; देश को भ्रमित कर लूटने वाले तमाम बीमा कंपनियों उनके बड़े आकाओं सहित उन बहुतेरे एसोसिएट बैंकों के आगामी समय में बुरे हाल होंगे! और साथ में उनके; जो पूंजीवाद के झांसे मे बड़ी आसानी से करोड़पति बनने के लिए उतावले हो जाते हैं! योग; राष्ट्रवाद; सनातनी हिन्दुत्व; आयुर्वेद और धर्म-शास्त्र आदि के बल पर खड़ा किया गया दवा-दारू का साम्राज्य के बुरे दिन शुरू होंगे! आभासी शेयर बजार धीरे-धीरे लुढ़कतें-लुढ़कतें अपनी दुर्गति को प्राप्त होगा! बहुत तीसमारखां हो; बहुत पढ़ाई पढ़ीं; बहुत दिमाग हैं! टैलेंट कूट-कूट कर नशों मे बह रहा हैं! बहुत अनुभवी हो! दुनियां को बहुत बेवकूफ़ बनाया; बाजार के बड़े गुरू हो; धुरंधर हो; विदेशों तक गोरखधंधें का तुम्हारा साम्राज्य फैला हैं? मूर्ख! सावधान! तुम्हारें साम्राज्य पर त्रिशूल की नजर हैं! कैसे बच सकते हो! कौन तुम्हें बचाएगा? तो ऐसे मे क्या करना हैं; कैसे खुद को सुरक्षित रख सकते हो; अपनी-अपनी बुद्धि लगाओ! कैसे निकल पाओगे विचार करों! तुम्हारा धर्म का धंधा और खोखला राष्टवाद तुम्हें नहीं बचा पायेगा! आने वाले समय में सभी को सड़कों पर पदयात्रा ही करना होगा! जहाज से मन्दिर-मन्दिर घूमना महंगा साबित हो सकता हैं! पलायन या देश छोड़ना और भी ज्यादा मुसीबतें लेकर आयेगा! इसे हलके में मत लेना!, कहते हैं न जैसी करनी वैसी भरनी! सब यहीं भरना होगा! मन्दिर तुम्हें बचा नहीं पायेगा! क्योंकि वहां कोई देवता हैं ही नहीं! यदि कुछ हैं तो वो तुम्हारें ही साथ हैं! तुम खुद हो! किसी मन्दिर-मस्जिद आदि मे सिवाय पाखण्ड के और कुछ नहीं! हर जगह सिर्फ दलाल ही बैठे हैं! तुम्हारें द्वारा बिना प्रदर्शन के एकाग्रता से किया गया सतकर्म; तप या संघर्ष ही फल के रूप में सामने आता हैं! जरूरत से ज्यादा फल तुम्हारा हाजमा खराब कर सकता हैं! तुमसे अनेकों पाप करवाने के लिए बाध्य कर देता हैं! संतुलन हर जगह आवश्यक हैं! किसी मूर्ति मे देव या देवी का निवास हैं ये कथावाचक पंडितों की मात्र कोरी कल्पना हैं! देव-देवी, राक्षस, हैवान, भूत-प्रेत; राजसी ठाठ आदि सब तुम्हारें अन्दर ही निवास करते हैं! जैसे तुम्हारें कर्म होते हैं वैसे ही उनका प्रभाव! ये तुम्हारें पर निर्भर हैं कि तुम्हें क्या और किसका साथ या सहयोग चाहिए! एक मात्र ईश्वर ही सबका नियंता हैं! संगत यदि गलत हो तो शुभ की आकांक्षा कैसे कर सकते हो! दिमाग में षडयंत्र चल रहा हो तो देवता; ईश्वर; राम या अल्लाह क्या करेंगे! किसी मूर्ति ने तुम्हारें हाथ मे एक रुपया भी रखा हो तो बताना? कल्पना के संसार से बाहर निकलों! सत्य सड़क पर हैं और झूठ फरेब बन्द ऐसी कमरों में या व्यास पर मठ मंदिरों मे! अपनी रणनीति बनाने मे? किसी गलतफहमी मे मत रहना! तुम्हारी मैं-गीरी; तुम्हारा अबतक का किया गया समाज से अनैतिक शोषण और धर्म-धंधे के नाम पर विस्तार ही तुम्हारा काल हैं! त्रिशूल तुम्हारें हर एक चाल पर पानी फ़ेर देगा! धंधा देश हो या दुनियां किसी का ज्यादा नहीं चलेगा! देर-सबेर तुम्हें वही पहुंचना हैं जहां से तुमने यात्रा की शुरूवात की थी! इसमे किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए! यहीं सत्य हैं !!!°°°

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°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°°

1025/☑️#गलतियों_को मत दोहराओं‼️

🎯#पीड़ित_गरीब_व_मध्यम_जनता? वर्षो से किए जा रहे तुम्हारें अनगिनत जुल्मों और फालतू के थोपे गये नियमों से खुद को मारकर जीना सीख लिया? इसी को तप कहते हैं! इसी को संघर्ष कहते हैं! अब वो! पीड़ित जागरूक मरी हुई जनता? जो जिन्दा हैं; मौज मे हैं; सत्ता पर काबिज हैं उनपर प्रहार करेंगी! उन्हें घेर कर मारेगी! कहां भागकर जाओगे महारथियों? समय ऐसा ही आने वाला हैं! यदि थोड़ी भी दृष्टि बचीं हो तो अपने चारों ओर ध्यान से देखों! एक ही त्रिशूल अनगिनत रूप धारण करके तुम्हारें पीछे लगा हैं जिन्हें तुम मूर्ख या कमजोर समझते थे! जिन्हें तुम महफ़िलों मे अपनी कोरी राम-कथा सुना कर बेवक़ूफ़ बनाते थे आज वही तुम्हारी काबिलियत को; सत्ता को; थोथें ज्ञान को नकार रहें हैं !!!°°°

🎯#यज्ञ_और_आहुति_का_तात्पर्य आज तक जो नहीं जान पाए रावण की तरह उन जैसे वेदों के ज्ञाता विद्वान महापंडित को जगतगुरू; पीठाधीश्वर; महामण्डलेश्वर; शंकराचार्य; कथा वाचक आदि का दर्जा किसने दिया? आहुति तो बिना आग घृत; धूप; नारियल प्रपंच आदि के वो तमाम पदयात्री और पीड़ित लोग दे रहे थे और आगे भी देंगे! और तुम हवन-कुंड; व्यास; महफिल; सिंहासन सजाकर सरकारी पेंशन और नेता; माफियाओं के लूट के पैसे पर सनातन हिन्दू के नाम पर एकजुट होकर स्वाहा-स्वाहा करते रहो! धर्म का धंधा कभी छूटना नहीं चाहिए! किन्तु अब समय वो नहीं जो अबतक करते आए हों! सब बदल जायेगा! तुम्हें भी धंधा छोड़ना होगा !!!°°°

🔴#पाखण्ड_सभी_धर्मों_में हैं! पाखण्ड के रूप में यदि मानव को कष्ट देने वाले तमाम आरोपित नियमों को दरकिनार कर दिया जाए तो हर एक धर्म खुद में श्रेष्ठ; महान और समान हैं! ना कोई ऊंचा ना कोई हीन!

#हिन्दू_मुस्लिम_सिक्ख_ईसाई ये सब मनुष्य के अपने अपने ढंग से जीवन जीने की पद्धतियां मात्र हैं जिसे धर्म का नाम दिया गया! हर एक मानव की अपनी सुविधानुसार स्वतंत्रता हैं वो किसी एक पद्धति को अपनी जीवन यात्रा की पूर्णता के लिए चुन सकता हैं! सनातन सबका जनक हैं! ये सभी वर्ण, धर्म, मत-मतांतर, पंथ, सम्प्रदाय आदि नहीं भी होंगे फिर भी सनातन रहेगा! पूरी सृष्टि के विनाश के बाद भी सनातन रहता है क्योंकि वह अविनाशी हैं! परम तत्व हैं! ईश्वर हैं! अल्लाह हैं! गॉड हैं! कल्याणकारी शिव हैं! रोम-रोम मे बसनें वाला राम हैं! अव्यक्त रहते हुए भी पूरी सृष्टि का गुरू हैं! और उसका ही अंश होने के कारण हर एक जीव चाहें मनुष्य हो; महापुरुष हो; देव हो या एक तुच्छ कीड़ा या फिर प्राकृतिक दृश्य-अदृश्य वस्तुएं सब सनातन हैं! किसी से कोई भेद नहीं! सब समान हैं! सबका आदर हैं! बल का प्रयोग करके किसी का धर्म परिवर्तन? उसके खुद के पतन का मुख्य कारण हैं! इससे सभी धर्मों को बचना चाहिए! धर्म परिवर्तन करना या कराना या उसे प्रचारित करना तुम्हारी संकीर्ण मानसिकता का परिचायक हैं! स्वतः मे अपराध हैं! ये गलतियां पहले से होती आंई हैं जो नहीं होनी चाहिएं थी! दूसरों ने जो पहले गलतियां की तुम उसे पुनः मत दोहराओं! धर्म-अधर्म के खेल में जो नियम तुम्हें असहज करे उसे त्याग दो किन्तु अपने ही धर्म में रहों! वहीं तुम सुखी हो! कोई भी धर्म कट्टरता को प्रसारित या पोषित नहीं करता बल्कि मनुष्यता को बड़ा बताता हैं! और मनुष्यता मे दया, करुणा, प्रेम, सेवा और सम्मान प्रमुख हैं जिसे हर एक नागरिक को अपने जीवन में अपनाना चाहिए !!!°°°

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1024/☑️#पहला_पड़ाव‼️

🔴#भारत_जोड़ों_यात्रा_जो कन्याकुमारी से चलकर आज कश्मीर के लालचौक पहुंची! तमाम पदयात्रियों सहित वो सभी लोग जो यात्रा में शामिल थे और वो भी जो यात्रा के दौरान इस सुन्दर यात्रा के साक्षी बने! रास्ते में अनेकों कठिनाइयों का दृढ़ता से सामना करते हुए आज झंडा लहराकर यात्रा की प्रथम परीक्षा मे पूर्णतया सफ़ल हुए! उन सभी पदयात्रियों सहित उनसे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़ने वाले सभी प्रबुद्ध प्रेमी नागरिको को पेज की तरफ से ढ़ेर सारा साधुवाद! यह लंबी यात्रा सिर्फ जैसा एक खिलाड़ी खेल के मैदान मे उतरने से पहले अपने शरीर को गर्म करने के लिए अभ्यास करता हैं जिसे वार्मअप कहते हैं! मात्र उतना ही हैं! यात्रा का पहला पड़ाव बस उससे ज्यादा और कुछ नहीं! मंजिल अभी बहुत दूर हैं! पूर्णाहुति तक तुम्हें निरंतर चलते रहना होगा! यात्रा के तमाम अनुभवों से कमर; अब और ज्यादा कसना होगा! निःस्वार्थ; निर्विरोध पीड़ित लोगों के दिलों को और साथ में; अपने भी घरों से भटके हुए भाइयों को जो जुड़ना चाहते हैं समझाकर प्रेम से जोड़ना होगा! आपसी मनमुटाव को खत्म करना होगा! अपने विचारों को एक विशाल दिल रखते हुए नया अंजाम देना होगा! गंदगी का ख्याल भी अपने मन में नहीं लाना हैं! अनुभव ही विचारों की अंदरुनी ऊर्जा को ऊर्ध्वगामी करते हैं! जहां भेद का कोई स्थान नहीं! नफरत की दीवार को तोड़ना होगा! जो काम आज तक एक करोड़ भगवा साधू नहीं कर पाए वो तुम्हें साधारण भेष व असाधारण सोच के साथ करना होगा! त्रिशूल तुम्हें पूर्ण समर्थन और पर्याप्त शक्ति देगा! किसान? युवाओं के साथ मिलकर अपना काम करे! संघर्ष ही जीवन हैं! सत्य; संघर्ष; एकजुटता; कर्तव्य और लक्ष्य भेदन ही वर्तमान का महामंत्र हैं! देश या दुनियां में भ्रस्टाचार की कोई जगह नहीं! सत्ता पैसे से हासिल होती हैं और पैसा बलवान होता हैं इस मिथ को तोड़ना होगा! पहले देश के अंतिम कतार में खड़े आखिरी व्यक्ति को शिक्षित बनाना होगा! उसे समृद्ध बनाना होगा! नेताओ और पूँजीपतियों के एकाधिकार को खत्म कर हर एक व्यक्ति को आगे बढ़ाना होगा! इसी विचारों के साथ आगे बढ़ते जाना हैं! युद्ध के मैदान मे भावना; प्रलोभन और पलायन का कोई स्थान नहीं! इस बात को समझना होगा!

🔴#भगवा_के_पास_ही_विवेक हैं इस मिथ को अपनी सहज विचारों और कर्म से तोड़ना होगा! ज्ञानी मठाधीशों; चमत्कारी बाबाओं और व्यासपीठ पर बैठे तमाम कथा वाचकों को ये सीख देनी होगी कि वास्तविक तप क्या होता हैं! एक साधू का कर्तब्य क्या होता हैं! सत्य क्या होता हैं! पाखण्ड क्या होता हैं! परिवर्तन या बदलाव क्या होता हैं! मुफ्त मे खाने वाले कटोराछाप बाबाओं की देश की उन्नति या राष्ट निर्माण मे भागीदारी कितनी हैं? यद्यपि उनके पास संसाधनों की कोई कमी नहीं! कर्तब्यों से पलायन क्या किसी साधू को शोभा देता हैं! घर मे काम ना करना पड़े! गरीबी मिटाने के लिए परिवार का त्याग कर नेता या साधू बन गए! अब मुफ्त का माल बाबा; नेता बनकर खा रहे हैं! और कोई काम इन्हें जमता नहीं!

#सदैव_ध्यान_रखों! परिवर्तन कभी नीचे से शुरू नहीं होता सदैव सत्ता के शीर्ष से शुरू होता हैं! शीर्ष जब ममता मे आकर धृतराष्ट्र की तरह अपनी आंखे बन्द कर लेता हैं! आधुनिकता का विलासी जीवन जीने लगता हैं! अतृप्त इच्छाओं की पूर्ति मे लग जाता हैं! अपनी सुरक्षा और पहनावे पर देश का पैसा और संसाधन खर्च करने लगता है! प्रदर्शन और प्रचार को अपना कर्तब्य समझने लगता हैं! सत्ता और शक्ति का दुरुपयोग भेद के साथ अपने अहंकार को पोषित करने के लिए करता हैं तो समाज और देश में भ्रष्टाचार फलता-फूलता हैं! नफरत फैलता हैं! गठजोड़ से पूंजीवादी शक्तियों को धन बंटोरने का बढावा मिलता हैं! पूरा समाज असंतुलित होकर बिखरने लगता हैं! हिंसा और अश्लीलता फैलती हैं! मैं मैं का बाजार गर्म होता हैं और पूरी दुनियां विनाश के मार्ग पर अग्रसर हो जाती हैं! वर्तमान ऐसा ही हैं! बिना खुद को समझे या सुधारे तुम शान्ति की बात नहीं कर सकते! क्योंकि तुम स्वमं अशांति और असंतोष से पीड़ित हो! ऐसे में तुम कोई भी सही निर्णय नहीं ले सकते! फिर दुनियां तुम्हारें अस्तित्व को सिरे से नकारने लगती हैं! फिर तुम कहीं के नहीं रहते ना ही घर के ना घाट के !!!°°°

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1023/☑️#हम_तो_डूबेगें सनम..‼️

🔴#हम_तो_डूबेगें_सनम तुम्हें भी ले डूबेगें? ताश के पत्तों पर खड़ी बड़े पूंजीपतियों की व्यावसायिक इमारत एक-एक करके डूबती ही जाएगी! और डूबेगें वो लोग जो इनके खामोश प्रशंसक हैं; सत्ताधारी हैं और वो भी जिन्होंने करोड़पति बनने के लिए इनके फॉर्मूले को अपनाया था! नाजायज तरीके से जनता का पैसा इनके साथ लगाया था और साथ में वो सभी जनता जो शॉर्टकट का रास्ता अपनाकर धनी बनना चाहतीं थी! इसे मात्र शुरूवात समझों! ना कोई पावरफूल रामदेव बचेगा ना ही कोई राम रहीम या अन्य!  विडंबना हैं जो काम भारत सरकार को करना चाहिए था वो त्रिशूल की प्रेरणा से कहीं और से हो रहा हैं! ऐसे में कैसे बनोगे विश्वगुरू? कैसे बचाओगें अपनी साख? कैसे बचाओगें अपनी दादागिरी? कैसे बचाओगें अपनी सरकार! युद्ध तुम करना नहीं चाहते! पकी पकाई खीर खाने की पहले से आदत हैं? सब देश लड़-भीड़ जाये हम मुफ्त मे बिना कुछ किए विश्वगुरू बन जाए! बलिहारी हैं तुम्हारी बुद्धि! तुम्हारी सोच! तुम्हारी तेजस्विता! दुनियां के सब महारथी तुम्हारा लोहा मानते हैं! देश चलाना और पार्कों में लाठी भाजने मे अन्तर होता हैं?

🔴#क्या_पाखण्ड; अनपढ़ बाबा; हवन या चमत्कार; कोरा पुस्तकीय कथा ज्ञान तुम्हें विश्वगुरू बना देगा? अदृश्य त्रिशूल का खेल तुम्हें समझ में नहीं आयेगा! त्रिशूल पहले ज्ञान देता हैं फिर निज अनुभव कराता हैं! माध्यम तुम्हीं में ही कोई अक्ल वाला बनता हैं! विश्वगुरू तो बहुत दूर मात्र एक अच्छा गुरू बनने के लिए तुम्हें मठ; धंधा; भगवा; सत्ता की चासनी त्याग कर पूरे भारत को पैदल नापना होगा! शुद्धि आवश्यक हैं अन्यथा पहले की तरह सिलिंडर कंधों पर लेकर सड़कों पर घूमते नजर आओगें! जितना भी हराम का कमाया यहीं और इसी दुनियां में भरना होगा! दूसरी कोई दुनियां नहीं! नए उम्र के कथावाचक नौजवान जिस उम्र में तुम्हें विवाह कर गृहस्थ धर्म का अनुभव लेना चाहिए था उस उम्र में व्यासपीठ पर तुम पति-पत्नी के अंदरुनी संबंधों पर व्याख्यान देते हो! कहां से आया इतना ज्ञान!

#जिस_उम्र_में_व्यास_की माया छोड़कर तुम्हें एकांत मे अपने कल्याण के लिए कोशिश करनी चाहिए उस उम्र में भी तुम गद्दी पर बैठे मलाई का स्वाद ले रहे हो! सत्ता और नेतागिरी से जुड़े हों! घरों में अपनी हुकूमत चला रहे हो! क्या यहीं सनातन हैं! गृहस्थ के कर्तब्यों से भाग कर साधू या नेता बनते हो फिर सत्ता से मरते समय तक चिपके रहते हो क्या यही सनातन या हिन्दू धर्म कहता हैं! चिपकाना सनातन नहीं हैं वो फिर व्यास से हो या सत्ता या मठ मन्दिर या घर मे सास, बहू, युवा-बच्चों या राजनीति आदि से! उम्र की अपनी मर्यादा हैं! कब तक बालो को काले रंग से पेंट करते रहोगे! कब तक प्लास्टिक सर्जरी से चेहरों की झुर्रियां छुपाते रहोगे! उम्र कब्र मे जाने की फिर भी फिल्मी महानायक तेल का प्रचार और कौन बनेगा करोड़पति मे मजमा लगाए बैठे हैं! मर जायेंगे किन्तु काम नहीं छोड़ेंगे! काम करते ही ऊपर जाएंगे! कहां हैं सनातन! जब तुम गद्दी से चिपके रहोगे तो दूसरों को मौका कैसे दे सकते हो! सन्यास कहां रहा! कौन तुम्हारा कल्याण कर सकता हैं! आदर्शो की; सनातन की; वेदों की बात करते हो तो इसकी शुरूवात स्वमं से करों! सत्य-शिव के वाचक सनातन को तुमने अपने वर्चस्व के लिए पूरी दुनियां में मज़ाक बना दिया! दूसरों को नसीहत देते हो तो कसौटी पर पहले खुद को तौलों अन्यथा पूर्ण पतन या महायुद्ध के लिए के लिए तैयार रहों !!!°°°

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एक कदम आध्यात्म की ओर..