975/☑️#हौसलें के साथ संघर्ष करों‼️

🔴#विहार_फिर_उत्तर-प्रदेश? केंद्र साधनें के लिए ये दो राज्य अति महत्वपूर्ण हैं! असल खेल की शुरूवात इन्हीं प्रदेशों से होगी! और आगे पूरे देश तक फैलेगीं! सभी प्रदेशों के युवा लीडरों के संयुक्त प्रयास से ये सब सिद्ध हो जायेगा! राजनीति से ऊपर उठकर सोचना होगा! सच्चाई और पूरी ईमानदारी से कमर कस लों! समय भरपूर हैं किन्तु बहुत ज्यादा नहीं! लड़ाई लंबी हैं! घटिया राजनीति नहीं करनी हैं क्योंकि जनता और त्रिशूल दोनों जागृत हैं! सब समझतें हैं! सच्चाई व ईमानदारी? चेहरें पर और अनुभवों में दिखनी चाहिए! पूरे प्रदेश में यात्रायें शुरू करों! एक-एक लोगों से मिलों उनकी समस्याएं सुनों! निडर होकर संघर्ष करों! जनता से सीधा संबाद करों! जेल जाना पड़े तो संकोच ना करों! यदि गलत धन या लालची लोग हैं तो उसे निकल जाने दो! सत्ता व तंत्र पर पूरी नजर रखों! कपट का सहारा ना लो! किसानों और पीडित नौजवानों की आवाज बनों! सबके साथ समानता का व्यावहार करों! झूठे आश्वासन किसी को ना दो! लालच तो कतई नहीं! मूल मुद्दों से ना भटकों! उसे पकड़कर हौसले के साथ संघर्ष करों! कम बोलों! मीडिया में उलटें सीधे ब्यानों को देनें से बचों! व्यक्तिगत आरोपों से भी बचों! पूरा खेल पलट जायेगा! हो सके तो पार्टी अध्यक्ष खुद या किसी राजनीतिक व्यक्ति को ना बना करके किसी सुप्रिम कोर्ट के सेवानिवृत जज या सुलझे हुए निष्कपट व्यक्ति को बनाओं! वो किसान भी हो सकता हैं या कोई ईमानदार गैर राजनीतिक सेवानिवृत अधिकारी भी! ईमानदारी अंकुश और निष्पक्षता होगी तभी तुम कामयाब हो पाओगे! बड़े बुजुर्गों का आशिर्वाद लों! बूढ़ें-मदारियों की सिवाय मार्गदर्शन के अब राजनीति में कोई भागीदारी नहीं होनी चाहिए! उन्हें राम नाम जपने के लिए माला दे दो और आशीष लेते रहों जिससे आगे का सही हो सकें! जानते हो यूक्रेन का एक युवा राष्ट्रपति ने अपने दृढ़ निश्चय से बुढ़े रूस के तानाशाह को पानी पिला रखा हैं! तानाशाह की बुद्धि ही काम नहीं कर रहीं! अदृश्य त्रिशूल की पूरी नजर दुनियां पर हैं! यूक्रेन की रक्षा में त्रिशूल की शक्ति खड़ी हैं! गंदी राजनीति; और तानाशाही प्रवृति को जड़ से बदलने का संकल्प लों! समय बदल रहा हैं अब खुद को बदलनें का वक्त हैं! हौसले से ही जंग जीती जाती हैं !!!°°°

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974/☑️#असल_बनाम नकल‼️

🔴#ब्राह्मण_वो_नहीं_जो_कथा करते हैं दुनियां से मन्दिर; धाम; सेवा; भंडारा या पंडाल के नाम पर लाखों करोड़ों का पर्ची के रूप में चन्दा और कैमरे के पीछे भीख मांगतें हैं! वीआईपी के तरह जीवन यापन करते हैं! नौटंकी व मंच पर आलीशान वस्त्र पहन चमत्कार दिखातें हैं! भूत प्रेत की नौटंकी दिखातें हैं? भगवान के नाम पर दूसरों का दुःख दूर करने का दावा करतें हैं! बड़ी-बड़ी गाड़ियों से सुरक्षा घेरे में चलते हैं! ये सब धंधेंबाज हैं! कौन सी कथा रामायण या महाभारत हैं जो तुमने नहीं सुनी! ब्राह्मण वो हैं जो सबसे पहले संसार के भोजन का प्रबंध करें फिर अन्न-जल ग्रहण करें! खुद को मलाई से दूर रखें ! इसके लिए उसे किसी देव से लड़ना पड़े या सरकार से या उसके किसी तंत्र से! जो पहले खुद के लिए सोचें वो ब्राह्मण नहीं हो सकता! उसे ब्राह्मणों का अपभ्रंश कर्मकांडी महापातर कहते हैं! जिन्होंने वर्तमान में अपना भेष बदल लिया! अपनी सरकार धाम या दरबार चला रहे हैं! ये सभी ब्राह्मण की नकल मात्र हैं! असल ब्राह्मण को मंदिर या अन्य धंधे से क्या सरोकार! निर्भय रहते हुएं निष्काम कर्म; तप से समाज और सत्ता को निर्लिप्त होकर सही राह दिखना ही श्रेष्ठ ब्राह्मण का कर्तव्य हैं! ब्राह्मण के रहते देश और दुनियां में इतनी असमानता; अशिक्षा; रुग्णता आदि क्यों? क्योंकि धंधा और लालच उनके साथ आ गया! यदि सही कहां जाय तो खुद ब्राह्मणों ने भी अपना धर्म ठीक से नहीं समझा! शास्त्रों एवं वेदों को रट कर सिर्फ पंडिताई की! कभी भी उसके मर्म को समझने की कोशिश नहीं की! कर्मकांड; पूजन-अर्चन मे ही फंसे रहें! यात्रा को पूर्ण किए बिना ही धंधे में उतर गएं! इसी का परिणाम हैं कि अन्य लालची तत्वों ने भी उन्हीं के पदचिन्हों का अनुकरण किया! ऐसा नहीं कि वर्तमान में असली ज्ञानी विद्व ब्राह्मण अपने देश मे नहीं हैं किन्तु मीडिया की पहुंच उन तक नहीं हैं! सात्विक जीवन हैं उनका! विवादों से दूर रहते हैं! आज भी उन बुजुर्ग ब्राह्मण के सामने बड़े-बड़े मंच साझा करने वाले कोई भी प्रसिद्ध कथावाचक या चमत्कारी धंधेबाज बाबा पांच मिनट भी टिक नहीं सकता! आने वाले समय में असली वाले नकली बाबाओं का पर्दाफाश करते भी दिखाई देंगे! तभी तो असली और नकली मे फर्क देख सकेंगे !!!°°°

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°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°

973/☑️#दुनियां_सुरक्षित_नहीं‼️

🔴#जब_तक_श्रीकृष्ण_साथ थे अन्य भाइयों के साथ सभी पांडव सहित युद्ध में अर्जुन का गांडीव; भीम का गदा-बल हाहाकार मचा देता था! वही गांडीव; वही गदा; वही तलवार; वही पांचो भाइयों का असीम बल काम नहीं आया जब श्रीकृष्ण ने आंखे उनकी तरफ से बन्द कर ली! चंद लुटेरें रास्ते में उनकें स्त्रियों सहित धन सम्पति को लूट कर चलते बनें! असहाय पाण्डव मुंह देखते रहें! तभी उन्होंने फैसला किया कि अब हमें सन्यास ले लेना चाहिए! समय अब वो नहीं रहा! फिर उन्होंने हिमालय की ओर प्रस्थान किया! आगे क्या हुआ आप सब जानते हैं! किस बात का गुमान सत्ताधारी नेता; पूंजीपति धनकुबेर व ईश्वर अवतारी बाबा करतें हैं! प्रसिद्धि और रस-भक्ति की अंधी दौड़ में एक दिन ना तुम्हारे पास बल होगा ना शक्ति? हिमालय जाने लायक भी नहीं रहोगे! तुम अपने घर; अपने मठ; अपने आप मे ही वीरान होकर रह जाओगें! पानी के लिए दूसरों पर निर्भर रहना होगा! यहां श्री कृष्ण का तात्पर्य किसी व्यक्ति विशेष से नहीं बल्कि उस परम सत्ता से हैं उस त्रिशूल से हैं जो अकेला अदृश्य रूप में अनन्त ब्रह्माण्डों पर नजर रखता हैं! अकर्ता हैं! दुनियां के पूंजीवाद सहित हर एक लालची; तानाशाह और मौकापरस्त इंसानों के सर के ऊपर काल बनकर मंडरा रहा हैं! जैसा कि पहले भी बताया? यूक्रेन तो सिर्फ बहाना हैं जहां त्रिशूल खड़ा हैं! रूस; चीन सहित पूरे दुनियां के तानाशाह बर्बाद हो जायेगें! भारत को भी इसका आने वाले समय में गम्भीर परिणाम भुगतान होगा! भारत सभी तरफ से अन्दर और बाहर घिरता जा रहा हैं! दूर जाती दिखाई पड़ती मुश्किलें कभी भी पलट सकती हैं! होशियारी या कोई भी पाखण्डी शक्तियों का हवन-पूजन; तंत्र-मंत्र आदि काम नहीं आने वाला! खैर जो भी हो? मुश्किल हालात में सरकारों की अपनी तैयारी कितनी हैं इसपर विचार करें! या फिर जैसे पाखण्डी बाबाओं के मशवरें से ताली; थाली आदि पटक फटक कर कोरोंना भगाया था उसी तरह इति श्री कर लेगा! इस समय दुनियां सुरक्षित नहीं! आने वाले समय में कभी भी महा-विनाश की घंटी कहीं से भी बज सकती हैं! इस साल के अन्त से उसकी आहट मिलनी शुरू हो जाएगी! प्रकृति का वीभत्स खेल भी देखने को मिलेगा! राजनीतिक उथल-पुथल; कोहराम का माहौल होगा! पूंजीवाद की रीढ़ की हड्डी और भी तेजी से दूटनी शुरू हो जाएगी! पूँजीवादी पलायन करेंगे! अन्तर और बाह्य जगत में बहुत कुछ बदलाव के संकेत मिलनें लगेंगें! यूक्रेन का युद्ध पूरी दुनियां के लिए प्रभावी परिणाम ले कर आयेगा! किसी भी देश को इसे हलके में नहीं लेना चाहिए! सभी देशों को यूक्रेन और उसके पीड़ित जनता की हृदय से मदद करनी चाहिए !!!°°°

#जिस युगल युवा नेता और उसके परिवार
ने अपनी तीन पीढ़ियों को देश के लिए कुर्बान
किया! उसके सामने कोई एक नेता का नाम
बताओं जिसके परिवार ने ऐसी अनमोल
शहादत दी हों! मलाई तो सत्ता और विपक्ष
दोनों ने भरपूर खाई और आज भी खा रहे हैं!
किन्तु लहू का एक बूंद भी देश के लिए नहीं
बहाया? नेतागीरी मे लाठी दण्डें खाना अलग
बात हैं! ये वही युगल जोड़ी हैं जिसके साथ
त्रिशूल खड़ा हैं और जिसके सर पर उसके
तीन पुश्तों का भरपूर आशिर्वाद हैं! जिसकी
प्रज्ञा जागृत हैं! उन्हें मामूली समझने की भूल
ना करना और छेड़नें की तो सोचना भी मत!
वो दोनों बिना भगवा के सच्चे कर्म-योगी हैं !!!°°°

घर के मन्दिर में अलग भगवान और सुदूर
आठ सौ किलोमीटर यात्रा करके पथरीले
पगडंडी पर ऊचाई चढ़कर अलग
प्रभावशाली वरदाता कष्टहर्ता भगवान के
दर्शन प्राप्त हो? ये कैसे हो सकता हैं! वो
कहते हैं न घर की मुर्गी साग बराबर!
मनुष्य की प्रकृति हैं उसकी निगाह खुद
के घर पर नहीं सुदूर के घर या दुकान
पर ज्यादा होती हैं !!!°°°

गांय और बकरीं में क्या अन्तर हैं?
दोनों ही शाकाहारी हैं
एक को माता का दर्जा देतें हैं
दूसरे को मार कर खातें है
क्या तुम्हें ज्ञात हैं कोई भी मानव
शाकाहारी नहीं हैं? क्या जो भोजन
हम सब करते हैं वो शाकाहार हैं
खुद से प्रश्न करों !!!°°°

अपने एक साँस से हज़ारों सुक्ष्म जीव को
अपना निवाला बनाते हैं! कुछ को पेट मे
रखकर बाकी को सांसो से बाहर निकालते
हैं! कैसे कह सकते हैं आप शाकाहारी हैं!
जो फलों का बीज या सब्ज़ी खाते हैं वही
फल या बीज फूटकर असंख्य पौधे पेड़
तथा बीज का निर्माण करते हैं! कैसे कह
सकते हैं आप शाकाहारी हैं! जो दही
खाते हैं उसमें लाखों की संख्या में
बैक्टीरिया होते हैं जिसे प्रेम से खाते हैं
फिर कैसे कह सकते हैं आप
शाकाहारी हैं !!!°°°

*༺⚜️꧁✴️‼️ॐ#शिव#ॐ‼️✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°

972/☑️#मन_की_शुद्धता‼️

🔴#मन_शुद्ध_हैं_नीयत_सही_हैं; साथ में सत्य; हौसला व संघर्ष हैं! छल-कपट; बेईमानी आदि नहीं हैं तो दुनियां की कोई ताकत तुम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकतीं! यहीं मानव जीवन का सबसे बड़ा महा-मंत्र हैं !!!°°°

🔴#तुम्हारें_बाह्य_या अंत: जगत मे यदि कुछ बुरा हैं तो उसे निकल जाने दो! उसे ना रोकों? गलत से उपराम हो जाओं! यदि नहीं निकला; उससे लिपट गएं तो हमेशा अपवित्र ही बनें रहोगें! तुम्हारें जीवन में भूत-प्रेत भय का ही निवास होगा! हिटलर या मनमौजी प्रसिद्ध लोगों की अतृप्त आत्मा तुम्हारें मन को प्रभावित करेगीं! जैसे कि बीस करोड़ गलत ढंग से कमाया उसमे पचास लाख हवन या कथा के आयोजन या अच्छे कार्य में खर्च कर दिए पश्चात तुम्हारा बाकी बचा धन शुद्ध हो गया ऐसी सोच तुम्हें व कथावाचक जैसे धनकुबेरों को सीधा आगे दुर्गति वाला जीवन जीने को मजबूर कर देगीं इसलिए मन की शुद्धता अनिवार्य हैं! तन; कपड़ा; वाणी; घंटा-भक्ति और बाह्य प्रदर्शन का ईश्वरीय जगत में कोई खास मूल्य नहीं! यदि मूल्य होता तो सबसे पहले फिल्म जगत या सफेदपोश शुद्ध हो जातें क्योंकि उनसे बढ़िया तन और कपड़ें का ध्यान भला कौन रखता हैं !!°°

#सही_अर्थों_में_मानव_जीवन_उस_निश्छल नदी की तरह से हैं जो तमाम पहाड़ों के थपेड़े खाकर भी सिर्फ गंतव्य की ओर बहना जानती हैं! उसका गंतव्य हैं सागर! इस मध्य वो सबके प्यास बुझाने और तन को शुद्ध ही नहीं अपितु उन तमाम निरीह जीव की जीविका का साधन भी बनती हैं जो उसपर आश्रित हैं! उसे अहंकार नहीं! किसी से कुछ लेना नहीं क्योंकि वह जानती हैं उसका अपना कोई अस्तित्व नहीं! अस्तित्व हैं सिर्फ महासागर का! ऐसे तमाम महासागर सिर्फ कुछ बुलबुले जैसे हैं जो हर क्षण जिसमें बनतें; बिगाड़तें और नष्ट हो जाते हैं वो हैं परमात्मा! फिर गरूर; धंधा; सेवा का अभिमान किस बात का साहेब! ताकतवर मानव उस ईश्वर के लिए एक चींटी जितना भी महत्व नहीं रखता !!!°°°

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°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°

971/☑️#अंधेरें_से_मत_घबराना‼️

🔴#अंधेरा_हमेशा_शुभ_फल लेकर आता हैं! अंधेरा ना हो तो प्रकाश का कोई अस्तित्व नहीं! अंधेरा ही प्रकाश की छोटी से छोटी किरणों का आभास कराता हैं! अंधेरा ना हो मानवीय जीवन का कोई मूल्य नहीं! अंधेरा एक उम्मीद हैं जो प्रकाश की ओर आगे बढ़ने के लिए जीव को अग्रसर करता हैं! अंधेरा ही पुराने कर्मों का आईना हैं! अंधेरा ही गुरू हैं जो तुम्हें सही राह दिखाता हैं! वो अंधेरा ही हैं जहां परमात्मा शिव का एकांत निवास हैं! सृष्टि के संचालन में अंधरें का अपना अति महत्वपूर्ण किरदार हैं !!!°°°

🔴#अंधेरे_से_कभी_मत_घबराना? अंधेरा मानव के अपने जीवन में वो परीक्षा हैं! वो ताकत हैं जहां से होकर सभी को एक ना एक दिन गुजरना ही होता हैं! कोई भी बच नहीं सकता! वहां दोनों आंख काम नहीं करती किन्तु प्रज्ञा जागृत हैं इसका बोध अंधेरा ही कराता हैं! अपना शरीर भी नहीं दिखता! सिर्फ होने का आभास होता हैं! हौसला; तप व संघर्ष के सहारे एक सच्चा साधक अंधेरी अटपटी मुश्किल अजनबी राहों को अपनी प्रज्ञा के सहारे आसानी से पार कर लेता हैं! #तत्पश्चात_एक_अन्तराल के बाद #अंधेरा व प्रकाश के बीच का द्वंद या भेद भी मिट जाता हैं! प्रज्ञा जो कि सुक्ष्म होती हैं? जागरण हेतु सत्य आचरण और परमेश्वर के प्रति अटूट निःस्वार्थ समर्पण अति आवश्यक हैं! अंधेरे से कोई गुरू निकाल देगा ये सोच मूर्खता हैं! जो गुरू स्वम अंधेरे में फंसा हो वो तुम्हें क्या निकालेगा! याद रखना अंधेरे में अकेले ही चलना पड़ता हैं बारात लेकर नहीं जा सकते! वहां तुम्हारी अपनी बुद्धि ही काम आएगी! गुरू या अन्य किसी की बुद्धि काम नहीं आने वाली !!!°°°

#प्रज्ञा_जागृत_से_प्राप्त_शक्ति या ऊर्जा को अपने उद्धार मे ना लगाकर यदि किसी अन्य सांसारिक कार्य; सिद्धियों या ख्याति प्राप्ति मे लगाया तो परिणाम अपेक्षित नहीं हो सकता! अक्सर विपरित और अनिष्टकारी देखने को मिलता हैं! झूठे; पाखण्डी; भेदी; चतुर; भक्तिरस मे रमें दिखावटी आध्यात्मिक धर्मज्ञ और विलासी लोग अंधेरे को बर्दाश्त करने से पहले ही अंधेरे का निवाला बन भूत-प्रेत; पिचास या राक्षस आदि योनि में चलें जाते हैं! और हज़ारों बर्षों तक उस योनि मे पड़े रहते हैं अपने जैसी ही किसी लौकिक प्रकृति वाले को निमित बना पूजवातें हैं! धंधा मृत्युपरांत भी वैसा ही चलता हैं! यदि समय रहते सम्भल जाते हैं आध्यात्मिक मर्म को अपनी बुद्धि और साधन से समझ कुछ अच्छा कर लेते हैं तो कुछ समय के लिए देवलोक का सुख इसी पृथ्वी पर अतिशीघ्र अगले जन्म में यथोचित कुल मे जन्म लेकर प्राप्त करते हैं और फिर भी नहीं संभलें तो पुनः कर्मानुसार अन्य योनियों में ऊपर-नीचे भटकते रहते हैं जब तक कि पूर्ण ज्ञान या उसके अपने शरीर में ईश्वरीय बोथ नहीं हो जाता तबतक पूर्ण मुक्ति प्राप्त नहीं होती! कहने के नाम पर हर साधु या सन्त मृत्युपरांत ब्रह्मलीन ही कहलाता हैं किन्तु यह पूर्ण सत्य नहीं हैं !!!°°°

*༺⚜️꧁✴️‼️ॐ#शिव#ॐ‼️✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°

एक कदम आध्यात्म की ओर..

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