Design a site like this with WordPress.com
Get started

1966/☑️# स्व_को_बदलों‼️

🔴#तुम_सियासती_नेता_जितना_पैसा..जितनी बुद्धि और शक्ति..सालों-साल चुनाव, प्रचार, पोस्टर, इश्तेहार, भीड़, घुड़दौड़, संगठन, रसूखदारों से दोस्ती निभाने, बेईमानी, झंडा-एजेंडा और अपने अहम को पोषित करने के लिए पर्दे के पीछे झूठे शानो-शौकत के पोषण में खर्च करते हो उस पैसे से यदि भेद रहित देश में हर एक व्यक्ति की निशुल्क शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा, प्रशिक्षण और उसके जीवन मे आने वाले रुकावटों के निवारण पर खर्च करों तो पूरा देश बदल जायेगा! तुम खुद नहीं बदलोगें और उम्मीद करोगे दुनियां बदल जाएं ये कैसे सम्भव हैं! यहीं कारण हैं अदृश्य त्रिशूल तुम सभी के सिर के ऊपर मंडरा रहा हैं! पूंजीवादी महात्वाकांक्षा, विस्तार, वर्चस्व, अन्याय, अत्याचार, भ्रष्ट-भेद, तानाशाही प्रवृति और समाज के प्रति तुम्हारें शोषण नें उसे जागृत कर दिया हैं! अब पूरी दुनियां में पूर्ण बदलाव तक या दुनियां के खात्मे तक किसी को चैन नहीं लेने देगा !!°°

🔴#एक_चार_आदमी_के_अमीर परिवार में दस-दस लेटेस्ट माडल की क़ीमती गाड़ियां; शानो-शौकत; नौकरों की फौज: आलीशान हवेली; महंगे शौक, आधुनिक संसाधन, सुरक्षा? क्या समझते हो ऐसे ही भोग के लायक हमेशा बने रहोगे विचार करना! ये सभी भोग तभी तक सुख प्रदान कर सकते हैं जबतक तुम मानसिक या शारीरिक रूप से स्वस्थ्य हो और दुनियादारी का बागडोर सम्भाले हो! किन्तु एक दिन उसके भी काबिल नहीं रहोगे!फिर क्या होगा जब अपने आंखों के सामने सब कुछ बर्बाद होते देखोगे! आने वाला समय कुछ ऐसा ही हैं!

🔴#देश-दुनियां में कई करोड़ की संख्या में पंडित, साधू, सन्त, मौलवी, पादरी आदि हैं उसमे सबसे ज्यादा सन्त समाज भारत में हैं फिर भी लोग दुःखी; परेशान और गरीब हैं क्यों? क्योंकि व्यवसाय, लालच और विस्तार की महत्वाकांक्षा नें तुम्हारें मन मष्तिष्क में घर बना लिया! धंधा एक सांसारिक पूंजीपति भी करता हैं और तुम भी राम-कथा और व्यथा सुनाकर पीछे से राजनीति करते हो! दोनों ही प्रारब्ध द्वारा विधान राजसी भोग भीगने के पश्चात सजा के हकदार होते हैं! तुम्हारें प्रवचन का असर समाज के लुटेरों पर क्यों नहीं होता! गरीब, मध्यम और कमजोरों पर ही क्यों? प्रश्न तुमसे ही हैं! चिन्तन करों!

🔴#पूरी_जिंदगी_ गद्दी_पर_ बैठकर सन्त आशाराम नें हरि ॐ, नारायण ॐ का जाप किया और अपने असंख्य भक्त और आश्रम देश-दुनियां के देशों में बनाये! गुरू मंत्र बांटे! अब उनका अन्त समय कैसा कट रहा हैं ये तुम्हारें लिए उदाहरण हैं! उसी तरह पूरी जिन्दगी साक्षी का तत्व ज्ञान देने और सम्भोग से समाधि तक पहुंचने वाले दर्शनशास्त्र के विद्वान ओशो ऐयाशी में महंगी घड़ियों और गाड़ियां का शौकीन था! देश विदेश में उसके लाखों भक्त हैं! उसका अन्त कैसे हुआ उसे तत्व से जुड़ने का मौका ही नहीं मिला! पर्दे के पीछे चला गया! प्रेत बना बैठा हैं! आज उसके आश्रम को लेकर उसके भक्तों के मध्य लड़ाइयां चल रहीं हैं! बाबा जय गुरूदेव, सत्य साई आदि अनेकों का हाल भी कमोबेश मिलता-जुलता ही वैसे ही हुआ! सबने सिर्फ आध्यात्म को बेचा! माल बटोरा! कुछ ना कुछ सेवा के नाम पर धन्धे बनाए और अन्य मे बेमौत दुनियां से रुखसत हुए! उनके भक्त माला जपते हुए मलाई वाले राह पर उन्हीं गुरुओं के पदचिन्हों पर चल रहें हैं!

🔴#मनुष्य_की_सद्गति..धंधे वाली भक्ति, कथा, प्रदर्शन, चमत्कार के प्रचार-प्रसार से नहीं होती! गुरू-भगवान बनकर पूजित हुए तो उसकी एक ही सजा हैं? मृतप्रान्त प्रेत-योनि में सदियों तक भटकना और अपनी अतृप्त भूख किसी मनचलें धन्धेवाज साधक के मन-मस्तिष्क पर कब्जा करके मिटाना और उसे प्रसिद्ध करना! ये उन प्रेतों का काम हैं जो अपने जीवन काल में तांत्रिक क्रियाओं और शास्त्रों के कर्मकांड में दक्ष थे! किन्तु स्वतः नियमों का पालन नहीं किया! सिर्फ दूसरों को उपदेश देते रहें! उन्हीं को ऐसे परंपरागत चतुर मूर्ख साधक लोग तांत्रिक क्रियाओं द्वारा सिद्ध कर विज्ञान और प्रचार के माध्यमों का उपयोग कर सरकारों के सहयोग से आजकल प्रसिद्ध हो रहें हैं! सभी प्रेत..भगवान के उपासक होते हैं! जैसा कि आजकल सिद्धि के नाम पर चमत्कारी कथावाचक पर्ची बनाने वाले बहुतेरे मानसिक रुग्ण बाबा चमत्कार, चिकित्सा के नाम पर तुच्छ तांत्रिक इलाज द्वारा लोगों से तरह-तरह के पूजा करवाते, लोगों से धाम का चक्कर लगवाते और लूटते हैं! इनके एक कला होती हैं वो हैं वो हैं कला का सम्मोहन! भाव-भंगिमा, साज, सजावट का आधुनिक उम्दा तालमेल! बातों की जादूगरी! भगवत नाम और रोचक कथा इसमे चार चांद लगा देती हैं! लोग मंत्रमुग्ध हो खिंचे चले आते हैं! फिर लूटते हैं! आशाराम भी ऐसे ही गुरू का शिष्य था! खूब यश और पैसा कमाया किन्तु अब देखों! चेहरे से नूर ग़ायब हैं! कभी नेता दरबार लगाया करते थे! दण्डवत प्रणाम करते थे! अब उनके भक्त फोटो के साथ दूसरों को ज्ञान दे रहे हैं! कभी इनके भी कथाओं का रेट करोड़ों मे था!

🔴#अपने_घरों_से_प्रेत की सिद्धि रखने वाले गुरू के तस्वीरों को अच्छा होगा निकाल दो! ये सही हैं कि तुम्हारें घर परिवार में धन-समप्ति में पूजा-पद्धति से अपेक्षित वृद्धि होगी किन्तु हमेशा ही बनी रहेगी ऐसा नहीं हैं! बाद में यदि रास्ते तनिक भी गलत हुए तो विपरित परस्थितियों आने पर दुःख प्राप्ति भी कई गुना ज्यादा होगी! ईश्वर का कोई भी नाम जिसे मानते हो उन्हें माध्यम मानकर उस एक ईश्वर से बिना बिचौलिया सीधा जुड़ों! कल्याण होगा! किन्तु उसका घूम-घूम कर प्रदर्शन मत करना और ना ही ज्यादा मांग! ये चाहिए वो चाहिए! लौकिक कुछ चाहिए तो उसके लिए अलग से प्रयास करों! काम-धंधे करों! अपनी भगवत उपासना को धंधे से मत जोड़ों! ईश्वर तुम्हारी जरूरतों को खुद देखता हैं! माँगकर अपने को हीन मत बनाओ! आध्यात्म शान्ति का मार्ग हैं! कटोरा रखकर भीख मांगने का नहीं! और अन्त में—

#ईश्वर_कभी_भी_नहीं_कहता तुम उसकी पूजा करों! चढ़ावा चढ़ाओं! भोग लगाओं! फूल-माला अगरबत्ती, मेवा मिस्री से उसको प्रसन्न करों! उससे मिन्नतें करों! सिर्फ इतना कहता हैं कि सर्वप्रथम ईमानदार और एक सच्चे इन्सान बनों! तुम स्वतः सामर्थ्यवान हो, जो कुछ पाना चाहते हो उसके लिए विश्वास के साथ पूर्ण सार्थक प्रयास करों! किन्तु याद रहें, जरूरत से ज्यादा धन का संचय और गलत ढंग से कमाया पैसा सिर्फ ऐयाशी, असत्य जैसी अनेकों बुराईयों को लेकर आयेगा फिर वो तुम्हें पतन के अंधेरे कुएं में सुन्दर चौड़े, चिकने रास्ते से आगे बढ़ाते हुए एक दिन पहुंचा देगा! पूंजीवाद की कहानी देश-विदेश मे देख ही रहें हो! मित्र लोग हवा भरनें में लगे हैं त्रिशूल प्रेम से दबा दे रहा हैं! इसलिए पहले खुद को बदलों !!!°°°

🎯#EVM में गड़बड़ी हैं! हैक हो सकता हैं! रिजल्ट सही नहीं आ रहा हैं! वोट कहीं और जा रहा हैं! धांधली हैं! चोरी हो रही हैं आदि! आवाज उठाते हो..किन्तु फिर भी उम्मीद में चुनाव लड़ते हो और हारते हो या खाने-कमाने; हो-हल्ला मचने के लिए कुछ सीट विपक्ष के नाम पर जीत भी जाते हो और फिर Evm को कोसना शुरू कर देते हो! हर बार का यही रोना! प्रश्न हैं यदि evm बदलना ही हैं तो पर्चा क्यों भरते हों! सीधा चुनाव आयोग से एकजुट होकर बोलों बैलेट से चुनाव होगा तभी पर्चा भरा जाएगा! या फिर सब मिलकर कोर्ट से अनुरोध करों! शिकायत करों! कुछ त्याग करों, पैदल यात्रा करों! निस्वार्थ सेवा करों तभी बुद्धि खुलेगी और देश के अन्तिम कोने तक बात पहुंचेगी! सेवा के लिए क्या सत्ता ही चाहिए मूर्खों! प्रश्न खुद से भी पूछो !!!°°°

*༺⚜️꧁✴️‼️ॐ#शिव#ॐ‼️✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°°

1965/☑️#गरूर‼️

जिन्दगी का खेल भी अजब निराला हैं..साहेब
इन्सान..सोचता..हैं कुछ…होता हैं कुछ..और..

नाहक लोग..आगे का…गुणा-गणित लगाते हैं
हवा..का झोका..फ़ेर देता हैं हर किए पर पानी
घरौंदा सपने का तोड़ मिट्टी को बहा देता पानी

नीति व नीयत..सही नहीं तो बरकत कैसे होगी
सत्य पर चल..झांक खुद में झूठ का वज़ूद नहीं
जब ईमान नहीं होगा..तो इंसानियत कहां होगी

गरूर ना कर ऐ इन्सान अपने जिस्म के यंत्र पर
वो दिन..दूर नहीं जब जिस्म से रूह फ़ना होगी

#बदला‼️

जिसका..हिसाब..करना..था..वो..तो चला…गया
हिसाब..उससे..मांग..रहा..जिसका..दोष ना था।

अब…तू….बता….तेरा….हिसाब….कैसे …होगा
तू भी चला जायेगा तो बांकी हिसाब किससे होगा।

*༺⚜️꧁✴️‼️ॐ#शिव#ॐ‼️✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°°

1964/☑️#एक_बूंद‼️(कविता)

ज्यों निकल कर बादलों की गोद से,
थी  अभी  एक बूंद कुछ आगे बढ़ी
सोचने फिर-फिर यही  मन में लगी
आह क्यों घर छोड़ कर मैं यों बढ़ी।

हे  दैव  मेरे  भाग्य  में  है क्या बदा
मै…बचूंगी…या  मिटूगीं…धूल…में
या…जलूंगी..गिर अंगारे पर किसी
या..किसी..दलदल..में जा धसूंगी।

चू..पड़ूंगी..या..कमल..के..फूल में
ऐसे..ही..मनोभावों..से वो थी घिरी
सोच..कर..परेशान थी उलझनों में
थक हार कर…
कर..दिया..खुद..को हवा के हवाले
सौप दिया खुद को नियंता के सहारे

और फिर…?

बह..गई..उस काल कुछ ऐसी हवा
वह..समुंदर..ओर..आई..अनमनी
एक..सुंदर..सीप का मुंह था खुला
वह..उसी..में..जा पड़ी मोती बनी।

लोग..यों..ही..हैं..झिझकते..सोचते
जबकि उनको छोड़ना पड़ता है घर
किन्तु..घर..का छोड़ना अक्सर उन्हें
बूंद..लौं..कुछ..ओर ही देता है कर।

*༺⚜️꧁✴️‼️ॐ#शिव#ॐ‼️✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°°

1063/☑️#पेज_को_फालो_मत करना वर्ना..‼️

🔴#राजनीति_में_ज्यादा_पढ़ा-लिखा बुद्धिमान..व्यक्ति दोगलापन में श्रेष्ठ होता हैं! मौका देखता हैं ऊंट किस करवट हैं! अपने हितों को साधने के लिए पर्दे के पीछे मिलजुल हाथ मिलाकर अपने लोगों की बलि बड़े प्यार से चढ़ा सकता हैं! राजनीति शतरंज का वह खेल हैं जिसमें कितना भी बड़ा धुरंधर हो मौत तक खुद भी फंसा रहता हैं! दूसरा..

🔴#जरूरत_से_ज्यादा बुद्धिमान व्यक्ति का कोई ईमान नहीं होता इस बात को समझों और सावधान रहों !!!°°°

🔴#कुछ _लोगों_की_अपनी विचारधारा होती हैं! कुछ लोग बे पेंदी के लोटे की तरह होते हैं किधर भी झुक कर खेल खराब कर देते हैं! जानते हुए भी अपनी टांग हर जगह अड़ातें हैं! चार कदम आगे और एक कदम पीछे! थोड़ा ही सही कुछ तो फायदा हुआ चीनी नीति पर अपना हित साधते हैं! जनता के हितों से इनका कोई सरोकार नहीं होता! इसी नीति पर मुख्य सरकार के साथ पीठ पीछे मिलजुल कर कुछ मौकापरस्त..स्टेट के क्षेत्रीय राजनीतिक दल काम कर रहे हैं! ये सामने से गाली देते हैं और पर्दे के..? ये किसी चतुर बाबा से कम नहीं !!!°°°

🔴#राजनीतिक_नफा-नुकशान या मलाई बचाने, खाने के लिए आंदोलन करोगे तो उससे अच्छा वर्तमान सरकार के साथ मेलजोल कर लो! कम से कम सुरक्षित तो रहोगे!और साथ में बाबाओं की तरह मनोकामना भी सिद्ध होगी! मलाई भी पूरी मिलती रहेगी! फिर इसमे बुराई ही क्या हैं! इसी काम के लिए धरती पर आए हों हवन-पूजन आदि भी ऐसे ही उद्देश्य की पूर्ति के लिए कर रहे हों तो दो ही विकल्प हैं या तो बाबा गैंग में या फिर सरकारी सत्ता गैंग में सीधे शामिल हो लो! पेज की बातों को फालो मत करना वर्ना खाली हाथ मुफ्त में मारे जाओगे! पानी भी नहीं मिलेगा! शहीद का तगमा भी नहीं मिलेगा !!!°°°

🔴#पूरी_दुनियां_तेजी_से_मृत्यु के गहरे अंधकारमय कुएं की तरफ आगे बढ़ रही हैं जिसकों जितना लूटना हैं लूट लो! जिसे जितनी धरती, धन, ऐश्वर्य, राष्ट या सत्तापद नापना हैं नाप लो! उन सब पर एकछत्र अधिकार तुम्हारा होगा! पेज तुम्हें बचन देता हैं !!!°°°

#किसानों_ने_एक_साल आंदोलन_किया! 700 से ज्यादा किसानों नें अपनी शहादत दी! जीत के समीप पहुंचते ही तमाम चेतावनियों के बावजूद एक घड़ें को राजनीतिक महत्वाकांक्षा पैदा हो गई! अधूरे आश्वासन पर उठ खड़े हुए! भावना में बह गए! चुनाव लड़े और बुरी तरह हारे! फायदा किसका हुआ तुम्हें पता हैं! हरियाणा, पंजाब, यूपी, राजस्थान, गुजरात..आदि में आज क्या बदल गया! विचार करना! ज्यादा फायदा देखोगे तो मारे जाओगे! #और_अन्त_में..अब किसानों को खुलकर किसी एक राजनीतिक दल का समर्थन करना चाहिए जो राष्टीय स्तर पर कार्य कर रही हो; संघर्षरत हो! वो पक्ष हो या विपक्ष अपनी सुविधानुसार चुन सकते हैं !!!°°°

*༺⚜️꧁✴️‼️ॐ#शिव#ॐ‼️✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°°

1062/☑️#सत्य_के_जानी_दुश्मन‼️

🔴#यदि_गोडसे_जैसे_विक्षिप्त कट्टर मानसिकता वाले मानवता और सत्य के दुश्मन..हत्यारें..दुनियां के शासन व्यवस्था में होंगे तो अदृश्य त्रिशूल तुम्हारें ही माध्यम से लाखों गांधी..को लाठी लिए पैदा कर देगा जो हर एक सड़कों पर पैदल यात्रा और लोगों को जगाते धन्धे की पोल-पट्टी खोलते नजर आयेंगे! हर शहर, गली, गांव, मुहल्लों मे होंगे! खाट के ऊपर नुक्कड़ सभाएं करेंगे! दुनियां का बच्चा-बच्चा, नौजवान, सेवानिवृत, पीड़ित, किसान, बुजुर्ग सहित महिलाएं..सभी गांधी होंगे !!!°°°

🔴#लड़ों!..पूरी ताक़त और दमखम से लड़ों! किस-किस से लड़ोगें! किस-किस को मारोगें! किस-किस को जेल भेजोगे! किस-किस पर देशद्रोह की धाराएं लगा मुकदमा चलाओगें! किस-किस को बाहर का रास्ता दिखाओगे! किस-किस की जमीनों को हड़पोगें! कबतक मूल मुद्दों से लोगों को भ्रमित करोगे! कहां-कहां धाम-दिव्य दरबार, मन्दिर सजाओंगे! अब वो समय नहीं! मूर्ख! बहुत कोशिश कर ली फिर भी तुम्हें समझ में नहीं आया पूंजीवाद का पूरा शरीर दलदल में फंसा हैं सिर्फ सर बाहर सांसे ले रहा हैं! और तुम दल, बल, कर्ज, लूट के पैसे को घुमाकर दलदल में जबरन हवा भरने की नाकाम कोशिश मे लगे हो! अपने अहंकार को पोषित कर रहें हो! देश को गिरवी रखकर जनता का अनैतिक बहुविधि से दोहन कर मित्रता निभाना कहां तक उचित हैं! दुर्योधन के तमाम साथी महारथी ने भी ऐसी ही मित्रता निभाई थी परिणाम क्या हुआ? तुम्हीं अपनी कथाओं में बताते हो !!!°°°

🔴#त्रिशूल_की_माया_प्रबल हैं! तुम्हारी और तुम्हारें धर्मज्ञ चतुर सहयोगियों की बुद्धि घुटनों मे आ गई हैं! मलाई; ऐयाशी, कोरी पढ़ाई और ऐसी कमरों की नीतियों ने तुम्हारें विवेक को ग्रसित कर लिया हैं! भाग रहे हो झूठ के दम पर! गधे की तरह! सत्ता को बचाने के लिए? अनपढ़, व्यावसायी तो शुरू से हो ही! बेवकूफ़ भी कम नहीं! ना गधा ना घोड़ा अपितु इसके मध्य खच्चर की नीति बुद्धि और नीयत हैं! कुदरत नें कृपा करके थोड़ा फल क्या दे दिया आसमान में उड़ते रहने के सपने देखने लगे! उसी मे मगन! खुद को दुनियां का शहंशाह समझने लगे! धन्धे, विपक्ष, विरोधी को तोड़ने-जोड़ने मे दिन-रात एक कर दिए !!!°°°

🔴#क्या कह रहे हो; क्या बोल रहें हो; अन्दर कुछ बाहर कुछ और! दोहरा चरित्र! नाटक-नौटंकी बस! क्या संदेश समाज, देश-दुनियां को दे रहे हों; खुद ही पता नहीं! बुद्धि देने वाले तुम्हारें ढेरों आईएएस, अधिकारी, पूँजीवादी मित्र, प्रचारतंत्र, तमाम चमत्कारी धर्मज्ञों और चाटुकारों के पास ईमानदार चपरासी बनने जैसी योग्यता नहीं! बस सभी को मलाई मिलती रहनी चाहिए! हर झोले पर बाबाजी का फोटो! अच्छा होगा मन्दिरों में भी माला के साथ टांग दो! खैर जो भी हो तुम अपना काम करते रहो जो पसन्द हो! पेज भी अपना काम कर रहा..विरोधी, विपक्ष, पत्रकार बन्धु सभी अपना! भीड़ अपना..और..इन सबके ऊपर तुम्हारें सर के ऊपर घूमता त्रिशूल का अपना अलग ही निराला खेल!..

🔴#मुस्लिम_सहित_अन्य_सभी धर्म और जातियों के मित्रों! तुमसे भी अपेक्षा हैं! मूलभूत मुद्दो से मत भटको! आवाज उठाओं! प्रश्न करों! सत्ता चाहें जिसकी हो निडर होकर बोलना सीखों! संविधान तुम्हें समानता, प्रश्न पूछने और गलत का पुरजोर विरोध करने का पूरा अधिकार देता हैं! इसमे किसी का एकाधिकार नहीं हैं! हाथ में क़लम देकर अपने बच्चों को नमाजी या टीका वाले पण्डित की जगह पढ़ा-लिखा बैरिस्टर (शिक्षा) के साथ सत्य के उपासक गांधी बनाने की कोशिश करो ना की सत्य को दबाने-कुचलने वाले तानाशाह, कातिल-आतंक का पर्याय #गोडसे..जैसे अत्याचारी उन्मादी हत्यारा बनाने की! या आईएएस अधिकारी बनाकर नेताओ के तलवे चाटने वालों की! ऐसी नौकरी से कोई फायदा नहीं! गुलामी की जिंदगी जीने से अच्छा हैं कुछ और कर लें!°°°

#भगतसिंह; बिस्मिल आदि जैसे अनेकों क्रांति के समर्थक होना या उन जैसा बनना सब्र की अन्तिम सीमा हैं जहां कोई विकल्प काम नहीं आता! जुल्म जब असह्य हो जाए वहां उग्र दल के लिए समय पर एक ही रास्ता बचता हैं वो हैं..युद्ध! लड़ने के तरीके अपने-अपने हैं! कोई नर्म अहिंसक तो कोई गर्म भगतसिंह जैसा! दोनों ही महत्तवपूर्ण हैं! किंतु अन्याय के खिलाफ! कायरता का स्थान कहीं भी नहीं हैं! ना यहां; ना वहां..यानि पर्दे के पीछे! और अन्त में..गोडसे जैसों को सम्मान देनें वाला! स्वार्थ मे आकर आतंक और हिंसा को पोषित करने वाला! समाज में भेद-भय का माहौल कायम करने वाला! बात-बात में झूठ बोलने वाला; समाज का नाना प्रकार टैक्स और जुर्माने से दोहन करने वाला; देश के पैसें या कर्ज लेकर हवाई यात्रा करने वाला; अपने शरीर और कुछ मित्रों की चिन्ता करने वाला! दूसरों को पीड़ा देने वाला! देवी-देवताओ के नाम पर चमत्कार दिखाने वाला! मैं ही सब? अंधविश्वास फैलाने वाला! धर्म के नाम पर शोषण करने वाला! जनता की सेवा के नाम पर लक्ष्मी (पैसे) का पुजारी..आदि..कभी भी..राम, कृष्ण, ईश्वर या अल्लाह आदि जिसे भी तुम मानते हो..का भक्त नहीं हो सकता! इस तथ्य को समझो !!!°°°

*༺⚜️꧁✴️‼️ॐ#शिव#ॐ‼️✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°°

एक कदम आध्यात्म की ओर..