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986/☑️#कितना पाने पर संतुष्ट-अंतिम‼️

🔴#राम_से_लेकर_बुद्ध_तक जितने धर्मों के महापुरुष हुए वो_सभी_अपने_रूप; पहनावा; खान-पान से नहीं अपितु अपने त्याग, तप, संघर्ष और कर्मों से पहचाने जाते हैं! ये कोई भी कर्मकांडी या धन्धेबाज नहीं थे! आध्यात्म में मठ-मंदिरों आदि का चौतरफा पसरा करते धंधे का कोई स्थान नहीं! अतः पहले खुद को बदलों! तानाशाह एवं विलासी प्रवृत्ति के सत्ताधारियों की सत्ता के प्रति गंदी मानसिकता और उनके तंत्र सहित उन्हें स्वतः को बदलने के लिए मजबूर करों! मलाई पर बैठे लालची एवं पाखण्डी लोगों को तप; खुद की पहचान व सत्यज्ञान हेतु हिमालय या एकान्त मे सत्य की परख हेतु भेजों! निडर होकर पुरजोर आवाज उठाओं! पहले भारत को बदलना होगा! भेदभाव रहित सबको जोड़ना होगा! मलाई रूपी गंदगी को निकाल फेंकना होगा! हर एक व्यक्ति को मानसिक; शारीरिक और आर्थिक रूप से मजबूत करना होगा! समान शिक्षा और चिकित्सा सबके लिए निशुल्क या न्यूनतम हर एक के पहुंच मे करना होगा! फिर दुनियां तुम्हारे पदचिन्हों पर चलेगी! ध्यान रहें लोकतंत्र में जनता के अलावा कोई राजा नहीं! जनता सुखी नहीं तो कोई सुखी नहीं! राम की तरह यदि कोई अपना राजधर्म ना निभा सके तो उसे सत्ता में रहने का कोई अधिकार नहीं! बड़े; चिपकू और रसूखदार बनने की कोशिश आगे उसे घनघोर अंधेरे में धकेल देगी! बाहुबली; सत्तावान; शक्तिवान; अमीरी; रईसी; नंबर 1, 2, 3, 4..जैसे शब्दों कहीं भी कोई स्थान नहीं! सोच बदलों! आचरण बदलों! अपने कर्म बदलों जो दुनियां को दिखाई दे! खुद को परमहंस; योगीराज; अवतारी; त्रिकालज्ञय; महान-गुरू व त्यागी कहलवाना और करोड़ों के सिंहासन पर बैठकर ज्ञान देना तुम्हें एक आम इंसान से भी ज्यादा तुच्छ कटोराछाप बना देता हैं! बिना पंडाल और लौकिक तामझाम के गांव-गांव पदयात्रा करके तुम्हें लोगों को अपने अधिकारों; व कलंकित जीवन के प्रति जागृत करना चाहिए! और इसकी शुरूवात सत्ता के विशिष्ठ पदों पर बैठें लोगों व पूंजीवाद से करों! वहीं समाज से तुम्हें अपने न्यूनतम शरीर निर्वाह के अतिरिक्त ज्यादा और कुछ नहीं लेना चाहिए! लक्ष्मी यंत्र बेचने या सवा लाख चालीसा पाठ करने कराने से या धामों के निर्माण से तुम्हारा कल्याण नहीं होगा यदि खुद में बदलाव नहीं  लाएंगे! ये बातें तुम्हें अभी समझ में नहीं आयेंगी किन्तु त्रिशूल समय आने पर सब समझा देगा! इसलिए बदलो अपने आप को तभी बदलेगा भारत और फिर बदलेगी दुनियां !!!🚥

“महत्तवपूर्ण तुम्हारा तप; दृष्टीकोण, कर्म एवं
संघर्ष हैं ना की जीत हासिल करना! जीत
कर तुम गद्दी हासिल कर लोगे फिर दुनियां
हाथ धोकर तुम्हारें पीछे पड़ जाएगी आगे
तुम स्वतः समझदार हो” !!!🚥

*༺⚜️꧁✴️‼️ॐ#शिव#ॐ‼️✴️꧂⚜️༻*
°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°

985/☑️#कितना पाने पर_सन्तुष्ट होगें-1/2‼️

🥀हर इन्सान मुहम्मद हैं!
🥀हर इन्सान कबीर हैं!
🥀हर इन्सान राम हैं!
🥀हर इन्सान इशू हैं!
🥀हर इन्सान गुरूगोविन्द हैं!
🥀हर इन्सान ब्रह्म हैं!
🥀हर इन्सान साकार हैं!
🥀हर इन्सान निराकार हैं!
🥀हर इन्सान शिव हैं !!!🚥

🔴#हर_इन्सान_वो_सब_कुछ_हैं जिसकी तुम दृश्य या अदृश्य रूप में देखते या कल्पना करते हो! इसलिए साकार रूप में दिखता भी हैं और मृत्यु के पश्चात अदृश्य रूप में तुम्हारे निजी विचारों एवं मान्यता में रहता हैं! तुम्हारें मन-मस्तिष्क को प्रभावित करता हैं! वो कोई भी हो सकता हैं! कभी सशरीर था किन्तु अब अदृष्य हो गया दिखता नहीं हैं! अतः वह हैं भी! तुम ना मानों तो नहीं भी? यहीं सुक्ष्म हैं! यद्यपि इसकी भी अपनी कोई सत्ता नहीं हैं! उधार से प्राप्त हैं! ऐसे ही देवी-देवता आदि भी! जिसे तुम भगवान मानते हो! यदि उन्हें तुम मानते हो तो तुम्हारें लिए वो हैं और यदि नहीं मानते तो नहीं भी! दोनों ही बातेँ अपनी जगह पर सत्य हैं! उस मानने या ना मानने के मध्य कुछ ऐसा हैं जिसकी तुम्हें खोज करनी हैं फिर बताना हैं कि वो हैं या नहीं! और यदि हैं तो क्या हैं? कैसा हैं? बिना खोज किए या यात्रा को पूर्ण किए तुम मानने या ना मानने के बीच सदैव भ्रमित रहोगे! दुनियां और खुद को ठगते रहोगे! गुरू ने बताया या दिखाया वो या शास्त्रों में पढ़ा या सुना? पूर्ण सत्य नहीं हैं बल्कि पूर्ण सत्य को जानने के लिए तुम्हें निरंतर सत्य को पकड़ पूर्णता की ओर अकेले यात्रा करनी होगी! भक्त या गुरू मंडली तुम्हारें साथ नहीं जायेगी! जब तुम खोज करते-करते सत्य को परख लोगें तब तुम्हारे सभी संशय का निराकरण हो जायेगा! शान्त होकर सदैव के लिए सत्य मे टिक जाओगे! तुम्हारा कर्म अकर्म में बदल जायेगा फिर तुम अपनी मान्यतानुसार ऊपर वर्णित बुद्धत्व आदि को प्राप्त होगे! तुम्हारें अंत: मे अन्य के प्रति नफरत; भेद; पद; प्रतिष्ठा; त्रिलोकी बनने व धन्धे आदि का लोभ मिट जायेगा? ये बातें आज के सभी धर्मों के धर्मगुरुओं के लिए भी महत्तवपूर्ण हैं जो अपने शिष्यों से कहते नहीं थकते कि मैं तुम्हें ईश्वर से मिला दूंगा! मेरे पास तमाम शक्तियां हैं! मैं तो 1008 हूँ! मैं ये हूँ मैं वो हूँ; मैं मैं आदि! मैं गुरू, भगवान, अवतारी पुरुष हूँ आदि /मुझसे जुड़ों! अपना सबकुछ मुझे समर्पित करों! खुद को श्री कृष्ण और तुम्हें अर्जुन बनाने की बातें करते हुए भ्रमित करते हैं! जो ये बातें कहते हैं! या देव देवी दर्शन की बात करते हैं प्रथम उन्हें अपनी अधूरी यात्रा को पूरा करना चाहिए! पुनः खुद से प्रश्न करों तुम कौन हो! धरती पर क्या करने आए हों! ढूंढो स्वं में स्वमं को! सिद्धि-प्रसिद्धि प्राप्त कर धंधा करना; धाम; मन्दिर-मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारें, आश्रम, वृद्धाश्रम, मठ आदि का निर्माण या चेलों का पसारा करने या सेवा में मेवा खोजकर खुद का भला करने से? तुम्हारें स्वमं का कल्याण ही कठिन हैं फिर तुम दूसरों का कल्याण क्या करोगे! खुद से प्रश्न करों कितना मिलने व कौन से सिंहासन पर बैठने से तुम पूर्णतया सन्तुष्ट हो जाओगें! यदि नहीं तो सिंहासन पर स्टेडियम; भव्य पंडाल या आडोटोरियम मे दुकान सजा अपने भक्तों के साथ बैठते ही क्यों हो? दुनियां भर का अपने ज्ञान का नुमाइश एवं प्रचार क्यों करते हो या भक्तो को इसकी अनुमति क्यों देते हो? क्या आध्यात्म बिना तथ्य या सत्य की खोज किए इसकी इजाजत देता हैं? दोस्तों! जो बातें लिखी जाती हैं वो अधिकांशतः देश-दुनियां के प्रभावशाली व विशिष्ट लोगों पर ही लागू होती हैं वो फिर आध्यात्म से जुड़ा हो या सत्ता के किसी विशेष पद से! क्योंकि बदलना पहले उन्हीं को हैं! उनमें बदलाव आयेगा तो वही बदलाव नीचे दृष्टिगोचर होगा! रामराज्य में राम को पहले बदलना पड़ा फिर राज्य बदला! इस तथ्य को समझना होगा! तुम्हें तो सिर्फ इस पेज की आवाज बनना हैं! निडर होकर प्रश्न करना हैं! प्रश्न तबतक करना हैं जब तक समाज-देश और दुनियां मे पूर्ण बदलाव दृष्टिगोचर नहीं होता! ना चैन से बैठना हैं ना सामने वाले को बैठने देना हैं? बाबाओं से वैसे ही सत्ताधारियों से चाहें कोई भी पार्टी या दल का हो जो त्रिलोकीनाथ बन कर लोगों को नित्य ठगने मे लगे हैं! कृपया कोई भी पेज से जुड़ा समान्य व्यक्ति इन विचारों को स्वं से ना जोड़ें !!!°°°क्रमशः 2/2🚥

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°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°

984/☑️#पहचानों_वो कौन हैं‼️

🔴#लुटेरों_के_भेष_मे_आज_विख्यात बाहुबली भगवा; काला; पीला; चमत्कारी एवं सफेदपोशों का आतंक व वर्चस्व हैं! सभी को उनके पूर्व में किए गए तप, प्रारब्ध, ईच्छा और कर्म का फल प्रसिद्धि के रूप में मिल रहा हैं! इसके अलावा भी वो तमाम इनके अनुयायी तथाकथित राष्ट्रवादी धंधेबाज शक्तियां एकजुट होकर इन्हीं के रंगों मे रंगकर नहाना चाहतीं हैं! सभी बहती गंगा में हाथ धोकर पवित्र हो रहे हैं! वस्त्र; कर्मकांड और शास्त्रवाणी ही वर्तमान परिपेक्ष्य में इनके अनाप-सनाप धन्धे; हथकण्डे सहित चंद पूंजीपतियों का सुरक्षा कवच हैं! दुःख होता हैं जब समय बदलेगा? इनका प्रभुत्व इनके कर्म से कलंकित होगा; फिर क्या होगा? क्योंकि काल (त्रिशूल) की गति तो स्वयं ब्रह्मा भी नहीं जानते फिर फफूंद की तरह देश में पनप रहे ऐसे धर्मज्ञ महागुरूओं की बात कौन करें! ऐसा बुजुर्गो से सुना था शक्ति, दौलत, प्रभुत्व, पद; प्रतिष्ठा; विलासिता, ऐश्वर्य और चमक आदि! ब्रह्मा की इस सृष्टि में कुछ भी स्थाई नहीं! यहां तक कि स्वं ब्रह्मा भी नहीं! सूर्य की लालिमा भी समय के साथ क्षीण हो जाती हैं और शाम होते ही वह उस स्थान के लिए विलुप्त भी जाता हैं! इन्हें तो ये भी पता नहीं जिन लोगों को छोटा; तुच्छ; निम्न; अनुयायी; गृहस्थ; भक्त या विरोधी समझ भीड़ इकट्टा कर अपनी चरण वंदना करवा रहे हैं या झुकाने की कोशिश में लगे हैं; जिसे वो अज्ञानी और अनपढ़ समझ तत्वज्ञान; भक्ति प्रसाद; भभूत; रक्षासूत्र दे रहे हैं; उसकी आड़ में भाति-भाति से शौषण और दोहन कर अपनी दुकान चला रहें हैं उन्हें पहचान पाएं कि नीचे बैठने वाले जिससे अपनी चरणवंदना करवा रहे हो वो आखिर हैं कौन? क्या तुमसे कम है? क्या तुम्हारे पास वो दृष्टि हैं जिससे देख या समझ सको या गद्दी; गुरुत्व के अहंकार या मतिभ्रम में उधर देखना ही नहीं चाहतें !!!°°°

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°°°•••✳️॥>ॐ !धन्यवाद!ॐ<॥✳️•••°°

983/☑️#आवरण_से_बाहर_आकर देखों‼️

🔴#लंबे_अन्तराल _पश्चात_आज_देश_के_एक वरिष्ठ निडर पत्रकार ने व्यवस्था द्वारा प्रदान किए गए आवरण से अपने आप को मुक्त कर लिया! शायद याद हो त्रिशूल नें तो उसे कुछ समय पहले ही मुक्त कर दिया था किन्तु खुद के अंतर्द्वंद से लड़ने व वैसा परिवेश बनने में इतना वक्त लगा! खैर जो भी हो? आगे वो स्वतंत्र रूप से पूरे समाज/देश को मुखरता के साथ जागृत करने या बदलाव लाने में अपना अति-महत्वपूर्ण योगदान देगा! वह और उसके जैसे अनेक पत्रकार जो निडर होकर जनता की आवाज हैं वो उन सभी मीडिया पर बहुत भारी पड़ने वाले हैं जो दलाली करने को अपना धर्म एवं ईमान समझते हैं! देश में अपने कर्म से गद्दारी करने वाले कोई अन्य नहीं! यहीं हैं! जो जनता की नहीं पूंजीवाद एवं सत्तावाद के संवाहक बने हैं! चंद रुपयों मे अपना ईमान बेच रहे हैं! अपना पेट देख रहे हैं! ध्यान रखों चीखने-चिल्लाने से तुम समय को नहीं बदल सकते! समय को बदलने की जिसने भी कोशिश की वो अंधेरे में समा गया! जिसने सच्चाई के साथ संघर्ष किया पीड़ितों की आवाज बनें; सत्ता से सवाल किया वो अंधेरे में रहकर भी दिया जलाने का सामर्थ्य रखते हैं! इस तथ्य को समझों! पद; मान और रुपया के बगैर भी तुम वो काम कर सकते हो जिसके लिए देवता लोग भी लालायित रहते हैं! मौका तो तुम्हें भी मिला किन्तु तुमनें लोगों को बेवकूफ़ बनाने जैसा घिनौना व निकृष्ट कार्य को अपना कर्म व धर्म समझा! स्मरण रहें? पत्रकार नें पद त्यागा हैं? सच्चाई; निष्ठा; समाज के प्रति समर्पण और अपने धर्म को नहीं! यहीं बात उसे पत्रकारिता के अनेकों चाटुकार चेहरों से अलग करती हैं! उसे अदृश्य त्रिशूल का साथ मिलेगा! एक इंसान की पहचान उसके रसूख या ओहदे से नहीं बल्कि कर्म से होती हैं! ओहदा; अपार-शक्ति और रसूख तो हिटलर के पास था किन्तु कर्म उसका निकृष्ट था इसीलिए समय आने पर जब कर्मों का प्रभाव पड़ा उसने स्वम के हाथों ही अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली! खुद को गोली मार ली किन्तु उसके पहले किस तरह की मन: स्थिति से वो गुजरा इसकी कल्पना भी करना मुश्किल हैं! आजतक उसका प्रेत भटक रहा हैं! दुनियां के तानाशाहों को अपना निशाना बना रहा हैं! इसलिए जो हज़ारों तरह के आवरण और चढ़ावें की चुनरियां अपने जिस्म के अन्दर और बाहर ओढ़ रखीं हैं उससे बाहर निकल कर देखों तुम्हें सच्चाई दिखाई देगीं !!!°°°

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982/☑️#सरकारी_भोंपू‼️

🔴#ईश्वर_की_प्रबल_माया_एवं_त्रिशूल_का प्रभाव देखना हो तो जो सड़कों पर तप कर रहे उन्हें छोड़कर विख्यात धर्मगुरुओं; मजहबी धार्मिक संगठनों; सत्ताधारी नेताओं; कुछ विशिष्ट पूंजीपतियों सहित मुख्य मीडिया; तंत्र एवं नौटंकीबाज बाबाओं के कृत्य; बोल; मुखमंडल एवं उनके फलते-फूलते बहु-धंधों की तरफ दृष्टिपात करें! ये सब सरकार के ही भोंपू हैं! कुछ मजबूरी में कुछ अपनी स्वेच्छा से! वो सभी मतिभ्रम से ग्रसित हो चुके हैं! कुंठाग्रस्त हैं! एक साथ चीखते-चिल्लाते, बिलखते, तड़पते हैं! एक प्रसिद्ध बाबा को भरे जलसे मे सुना बेरोजगारी के लिए सरकार की तरफ से सफाई एवं मजबूरी पर ज्ञानगंगा बहाते हुए! बाबाओं का ज्ञान और जादू भीड़ के माध्यम से सिर्फ आर्थिक रूप से अधिकांशतः समान्य; मध्यम एवं निम्न वर्ग पर ही चलता हैं! ये कभी सत्तावाद; पूंजीवाद; महंगाई; अनैतिक दोहन; माफियावाद; भ्रस्टाचार; सामाजिक कुरीतियों एवं लूट आदि के खिलाफ नहीं बोलते! सबको समान शिक्षा व चिकित्सा मिले? ये तो बहुत दूर की बात हैं! इन अवतारी महापुरुषों को दुनियां से अपनी चरण वंदना करवानी हैं! अपने त्याग तपोबल का ढिंढोरा पीटना हैं! इनके ज्ञान का नेताओ; पूँजीपतियों और समाज में अन्य विशिष्ट महात्वाकांक्षी लोगों पर कोई असर नहीं! यद्यपि इन्हें पता हैं सुधार प्रथम नीचे से नहीं बल्कि ऊपर से शुरू होता हैं! इनकी महत्वाकांक्षा इतनी बड़ी हैं कि यदि बस चलें तो हनुमान जी की तरह पृथ्वी की बात कौन कहे सूर्य को भी अपना निवाला बना ले! दुःखी एवं मनमुख महिलाओं को ये भीड़ जुटाने; प्रचार व हथियार की तरह ईस्तेमाल करते हैं! नेताओं की तरह करोड़ों पर कुन्डली मार कर बैठे ये अवतारी महापुरुष गीता, ज्ञान, रामायण, राम और हनुमान की बात करते हैं! खुद नहीं बनना चाहते? किन्तु व्यास पीठ से लोगों को बनने के लिए जागृत करते हैं! इनकी विशाल शक्ति के आगे दुनियां बौनी हैं! किन्तु ध्यान रहें बदलेगा सब और इन्हें भी बदलना होगा! यूक्रेन की आग धीरे-धीरे पूरी दुनियां को अपने आगोश में लपेट लेगा! कोई इसे हल्के में ना ले! मानव की अपनी महत्वाकांक्षा; तानाशाही एवं लालच ही इसका हेतु होगा! पूंजीवाद का बुलबुला फटेगा देश एक-एक करके बर्बाद होते जाएंगे! कोई भी तंत्र; पाखण्ड; धार्मिक अनुष्ठान;भूत प्रेत काम नहीं आयेगा! ये सब हो उसके पहले ऊपर वाले देश दुनियां के विशिष्ट लोगों को अपने मे बदलाव लाना होगा! या आगे का रास्ता विधि का विधान (नियति) ही तय करेगा !!!°°°

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एक कदम आध्यात्म की ओर..